अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के लखनपुर गांव की उस रात में बस बारिश थी, सन्नाटा था और एक आदमी था… मगबूल शेख। गांव में लोग उन्हें “शेखू” कहकर बुलाते थे। एक मेहनती पत्थर व्यवसायी, जो हमेशा मुस्कराकर बात करता था। मगर उस रात उसकी मुस्कान हमेशा के लिए मिट गई। मगबूल रोज की तरह शाम को घर के पास की चाय की दुकान पर गए थे। बरसात शुरू हुई तो उन्होंने सोचा… “जब तक रुकती नहीं, एक कप और पी लेते हैं।” दुकान में बैठे-बैठे रात गहराती गई। जब लगा कि अब लौट जाना चाहिए, तो वे छतरी संभालकर घर की ओर बढ़े। लेकिन घर पहुंचने से पहले ही, किसी ने अंधेरे में घात लगाकर उनकी पीठ में गोली दाग दी। बारिश की आवाज में गूंजती वह एक गोली, पूरे गांव की नींद उड़ा गई।
घर के दहलीज पर गिरी जिंदगी
गोली की आवाज सुनकर जब परिवार बाहर भागा, मगबूल जमीन पर गिर चुके थे। खून से भीगा कपड़ा, कांपते होंठ और चारों तरफ बारिश की बौछारें। परिवार ने किसी तरह उन्हें उठाया और सोनाजोड़ी अस्पताल की ओर भागे। डॉक्टरों ने कहा कि हालत नाजुक है, तुरंत रेफर करो। पश्चिम बंगाल के अस्पताल ले जाया जा रहा था, मगर रास्ते में ही उनकी सांसे थम गईं।
“अब्बा बस चाय पीने गए थे…”
उनका बेटा जमाल शेख बार-बार यही दोहराता है, “अब्बा तो बस चाय पीने गए थे…” उसकी आंखें लाल हैं, गुस्सा भी है और डर भी। वह बताता है कि गांव के ही दानारुल शेख से पुराने लफड़े ने आज उसके पिता की जान ले ली। जमाल का दावा है कि गोली लालून शेख ने चलाई, छह लोग थे, सबने मिलकर मारा।
पुलिस हर दिशा में तलाश कर रही सुराग
मुफस्सिल थानेदार गौरव कुमार ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है, पूछताछ जारी है। पुलिस मानती है कि मामला पुरानी रंजिश से जुड़ा है। गांव के लोग भी फुसफुसाकर वही कह रहे हैं कि दो साल पुरानी दुश्मनी का नतीजा है यह मर्डर। एक परिवार उजड़ गया, दो बेटे और एक बेटी अनाथ हो गए।
गांव का सन्नाटा, जो शब्दों से भारी है
सुबह होते-होते लखनपुर में हर दरवाजे पर मातम था। बच्चे सहमे हुए हैं, औरतें बिलख रही हैं। चाय की वही दुकान अब बंद है। दुकान की छत से अभी भी बारिश की कुछ बूंदें टपक रही हैं, जैसे उस रात की आखिरी गवाही दे रही हों।
इसे भी पढ़ें : सऊदी क्रॉस फा’यरिंग में झारखंड के विजय महतो की मौ’त, बॉडी लाने की प्रक्रिया शुरू

