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Ranchi : रांची का होटवार जेल यानी भगवान बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा झारखंड का सबसे बड़ा जेल है। बाहर से देखने पर यह एक सख्त सुरक्षा व्यवस्था वाली इमारत लगती है, लेकिन अंदर की कहानी कुछ और ही है। सामने आई एक शिकायत ने जेल के अंदर के जीवन की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है।
जब जेल खुद बन जाए शोषण का अड्डा
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने जेल IG सुदर्शन मंडल को पत्र लिखकर जो बातें कही हैं, वे अंदरूनी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। राजेश सिंह का कहना है कि जेल में NIA का बंदी प्रभु साहू अवैध रूप से कैंटीन चला रहा है, जहां रोजमर्रा की वस्तुएं मनमाने दामों पर बेची जा रही हैं। प्याज 150 रुपये किलो और टमाटर 100 रुपये किलो। ये दाम किसी पांच सितारा होटल के नहीं, बल्कि जेल की कैंटीन के बताए जा रहे हैं।
कैदियों पर दबाव : “खराब खाना” खाने या पैसा देने की मजबूरी
शिकायत पत्र में इल्जाम है कि जेल में आम कैदियों के लिए जो खाना बनाया जाता है, उसे जानबूझकर खराब करवा दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि कैदी मजबूरी में कैंटीन से महंगा खाना खरीदते हैं। जो नहीं खरीद पाते, उन्हें सूखी रोटी जलाकर आग बनानी पड़ती है, जिसपर वे लोग रोटी सेकते और फिर अपना पेट भरते हैं। वहीं, कुछ कैदी खुद खाना बनाते हैं, लेकिन इसके लिए भी उन्हें हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक देना पड़ता है। कल्पना कीजिए, आप एक संकरी कोठरी में हैं, चारों तरफ सीलन है और सामने जलती सूखी रोटी से उठता धुआं। यही दृश्य वहां के कई कैदियों के जीवन का हिस्सा बन गया है।
कैदियों को मोबाइल फोन तक आसानी से उपलब्द्ध कराता है NIA कैदी
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि प्रभु साहू पैसे लेकर कैदियों को मोबाइल फोन मुहैया कराते हैं। कैंटीन का सामान बाहर से टेंपो से लाया जाता है और उसी दौरान मोबाइल फोन भी अंदर पहुंचाए जाते हैं। बताया गया है कि साहू खुद जेल के भीतर खुलेआम मोबाइल का इस्तेमाल करता है।
शिकायतकर्ता के पास सबूत मौजूद
मानवाधिकार संगठन के राजेश सिंह का कहना है कि जेल कोर्ट के अधीन होता है और वहां हर कैदी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। राजेश ने कहा कि किसी भी कैदी के साथ भेदभाव या आर्थिक शोषण अस्वीकार्य है। संगठन ने जांच की मांग करते हुए कहा कि उनके पास सभी सबूत मौजूद हैं जिन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

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