अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Chaibasa : चाईबासा के पुरनापानी बाजार टांड़ में उस दिन आम दिनों जैसा ही हलचल थी। साप्ताहिक बाजार लगा था, लोग सामान खरीद रहे थे। इसी भीड़ में पारा टीचर मुकरु देवगम भी पहुंचे थे। परिवार के लिए कुछ रोजमर्रा के सामान लेना था और दोस्तों के साथ थोड़ी देर बैठकर हड़िया पीना था। लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि यह शाम उनकी जिंदगी की आखिरी शाम बन जाएगी।
परिवार जो अब भी इंतजार जैसे हाल में
करीब 50 साल के मुकरु देवगम कई सालों से बच्चों को पढ़ा रहे थे। गांव में लोग उन्हें सम्मान देते थे। परिवार को भरोसा था कि वे हर बार की तरह बाजार से लौट आएंगे। लेकिन देर रात तक जब दरवाजा नहीं खटका तो घर पर बेचैनी बढ़ने लगी। कुछ कॉल किए गए, कुछ रिश्तेदारों को पूछा गया। तभी खबर आई कि बाजार में किसी शिक्षक के साथ घटना हुई है। घर वालों के पैरों तले से जमीन खिसक गई।
एक मामूली झगड़ा जिसने छीन ली एक जिंदगी
पुलिस जांच में जो सामने आया, वह और भी हैरान करने वाला था। हड़िया पीने के दौरान छोटा सा झगड़ा बड़ा लफड़ा में बदल गया। उसी बाजार में मौजूद तीन युवकों से किसी बात पर कहासुनी हो गई। मामला इतना बढ़ा कि गुस्से में उन्होंने पत्थर और डंडों से हमला कर दिया। मुकरु देवगम गिरते गए, चोटें बढ़ती गईं और कुछ ही मिनटों में उनकी सांसें थम गईं। तीनों आरोपी वहां से भाग निकले, लेकिन जिस बाजार में हर सप्ताह रौनक रहती थी, उसी जगह उस दिन सन्नाटा छा गया।
पुलिस की तेजी से हुई कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमित रेणु ने तुरंत एक विशेष टीम बनाई। एसडीपीओ राफाएल मुर्मू के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। गांव केंजरा में छिपे तीनों आरोपी 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिए गए।गिरफ्तार संदेही गुनहगारों के नाम सोमा सुन्डी (25), सीनू गौड़ (20) और मंगल कारोवा (20) बताये गये। पूछताछ में उन्होंने सबकुछ कबूल किया। वारदात में इस्तेमाल खून से सना पत्थर, लकड़ी का डंडा और उनके कपड़े बरामद हुए तो मामले की तस्वीर और साफ हो गई। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया है।
इसे भी पढ़ें : एक ही रात में तोड़ डाला पांच दुकानों का ताला, फिर…

