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Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह की ठंडी हवा में जब कालिदासपुर लैम्प्स परिसर में ट्रैक्टरों की कतार लगी, तो सिर्फ धान की बोरियां नहीं आई थीं, साथ में आई थी किसानों की उम्मीद। कई किसानों के चेहरे पर पहली बार यह भरोसा दिखा कि इस बार उनकी मेहनत का दाम समय पर और पूरा मिलेगा। गांव के किसान रमेश मंडल बताते हैं, “पहले बिचौलियों के भरोसे धान बेचना पड़ता था। दाम भी कम मिलता था और भुगतान के लिए महीनों चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सीधे केंद्र पर धान दे रहे हैं और पैसा बैंक खाते में आएगा, यही सबसे बड़ी राहत है।”
सही दाम, बिना कटौती
इस वर्ष सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके साथ 81 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर किसानों को कुल 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिलेगा। यह राशि एकमुश्त सीधे किसानों के बैंक खातों में जाएगी। केंद्र पर मौजूद कई किसानों ने बताया कि पहले तौल और नमी के नाम पर कटौती आम बात थी। लेकिन इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से मनमानी की गुंजाइश कम हो गई है।
उद्घाटन नहीं, भरोसे की शुरुआत
कालिदासपुर लैम्प्स धान अधिप्राप्ति केंद्र का उद्घाटन डीसी मनीष कुमार ने किया। फीता काटने के बाद उन्होंने खुद केंद्र का निरीक्षण किया, किसानों से बातचीत की और पूरी प्रक्रिया को समझाया। डीसी ने कहा कि इन केंद्रों का मकसद सिर्फ धान खरीदना नहीं, बल्कि किसानों को बिचौलियों से मुक्त करना और पारदर्शी व्यवस्था देना है। पैक्स के जरिए धान बेचने के बाद राशि सीधे खाते में जाएगी, ताकि किसी को परेशान न होना पड़े।

डिजिटल व्यवस्था से बदली तस्वीर
इस बार सभी अधिप्राप्ति केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 4G आधारित पीओएस मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इससे तौल से लेकर रसीद तक सब कुछ रिकॉर्ड में आ रहा है। किसान सीता सोरेन कहती हैं, “पहले रसीद के लिए भी इंतजार करना पड़ता था। अब मशीन से तुरंत पर्ची मिल रही है। लगता है जैसे सिस्टम सच में हमारे लिए बना हो।”
दो से तीन महीने तक खुले रहेंगे केंद्र
प्रशासन के अनुसार धान अधिप्राप्ति का काम अगले दो से तीन महीने तक चलेगा। जिले के 19 लैम्प्स और पैक्स तय समय पर खुले रहेंगे। किसानों के लिए ई पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी है, जिसे वे खुद या फिर सरकारी कार्यालयों की मदद से करा सकते हैं।

लक्ष्य बड़ा, उम्मीदें उससे भी बड़ी
इस साल पाकुड़ जिले में करीब 2 लाख क्विंटल धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल यह आंकड़ा लगभग 95 हजार क्विंटल रहा था। अच्छी फसल और बदली व्यवस्था को देखकर प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार ज्यादा किसान सरकारी केंद्रों का रुख करेंगे। शाम होते होते केंद्र से लौटते किसानों के चेहरों पर थकान जरूर थी, लेकिन आंखों में संतोष भी था। खेतों में बहाया गया पसीना अब सही दाम पाएगा, यही भरोसा इस धान अधिप्राप्ति की असली कहानी है।
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