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Muzaffarpur : “पापा सबको फांसी पर झूला दिए और खुद भी झूल गए…” यह शब्द किसी कहानी के नहीं थे। यह उस मासूम बच्चे की आवाज थी, जो भोर की खामोशी चीरते हुए गांव में दौड़ा था। उसकी जुबान लड़खड़ा रही थी, आंखों में डर था और चेहरे पर ऐसा सन्नाटा, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। गांव वाले जब उसके पीछे उस घर तक पहुंचे, तो अंदर का दृश्य देखकर कदम वहीं थम गए। सकरा थाना क्षेत्र के नवलपुर मिश्रौलिया वार्ड संख्या 04 के उस छोटे से घर में चार जिंदगियां फंदे से लटक रही थीं। एक पिता अमरनाथ राम और उसकी तीन बेटियां अनुराधा, शिवानी और राधिका। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की सांसें चल रही थीं, वहां अब सिर्फ मौत की चुप्पी थी।
मां की मौत के बाद अकेला पड़ गया था पिता
करीब एक साल पहले अमरनाथ की पत्नी की मौत हो गई थी। तब से वह अकेले ही पांच बच्चों की जिम्मेदारी उठा रहा था। मजदूरी करता था, लेकिन काम रोज नहीं मिलता था। कभी कमाई होती तो चूल्हा जलता, नहीं तो डीलर से मिलने वाले राशन पर परिवार की गाड़ी चलती थी। गांव के लोग बताते हैं कि वह ज्यादा बोलता नहीं था। अक्सर चुपचाप बैठा रहता। शायद अपने बच्चों को देखता और उनके भविष्य के बारे में सोचता रहता। तीन बेटियां और दो बेटे, सबकी आंखों में सवाल थे, जिनका जवाब उसके पास नहीं था।
उस रात टूट गया हौसला
किस हालात में उसने यह फैसला लिया, इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है। लेकिन इतना साफ है कि गरीबी, अकेलापन और जिम्मेदारियों का बोझ उसके हौसले से भारी पड़ गया। उसने अपनी तीन बेटियों को मौत के हवाले कर दिया और फिर खुद भी फंदे पर झूल गया। बताया जा रहा है कि उसने अपने दो बेटों शिवम और अभिराज को भी मारने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों मासूम किसी तरह बच गए। आज वही बच्चे इस परिवार की इकलौती बची सांसें हैं।
सुबह का मंजर अब भी आंखों में कैद
मृतक के चाचा सीताराम राम बताते हैं कि सुबह चार बजे के करीब बच्चा दौड़ता हुआ घर आया और बोला कि पापा सबको फांसी पर झूला दिए और खुद भी झूल गए। जब लोग घर पहुंचे तो किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी अंदर जाने की। बेटियों के पांव हवा में झूल रहे थे और पिता भी उसी रस्सी का शिकार बना था, जिससे उसने अपने सपनों को बांध रखा था।
गांव में पसरा मातम
पड़ोसी जितेंद्र कुमार कहते हैं कि किसी ने सोचा भी नहीं था कि अमरनाथ ऐसा कदम उठा लेगा। वह मजदूरी करता था, घर में ही रहता था। अचानक पूरा परिवार खत्म हो गया, यह बात आज भी समझ से बाहर है।
दो मासूमों का भविष्य सवालों में
इस दर्दनाक घटना के बाद अब उस घर में सिर्फ दो मासूम बेटे बचे हैं। न मां, न पिता, न बहनें। गांव के लोग उन्हें देखकर चुप हो जाते हैं। हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि इन बच्चों का भविष्य क्या होगा। घटना की सूचना के बाद सकरा थाना पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। ले
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