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Home » 35 संगीन कांडों में वांटेड PLFI के आलोक ने डाला हथियार, SP क्या बोल गये… देखें
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35 संगीन कांडों में वांटेड PLFI के आलोक ने डाला हथियार, SP क्या बोल गये… देखें

December 19, 2025No Comments4 Mins Read
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Latehar : लातेहार के जंगलों में करीब 12 सालों तक एक नाम डर बनकर घूमता रहा। PLFI उग्रवादी आलोक यादव। एक लाख रुपये का इनामी। जिस पर पुलिस की फाइलों में 35 से अधिक मामले दर्ज थे। वही आलोक यादव शुक्रवार को बिना किसी शोर के लातेहार पुलिस एसपी कुमार गौरव के दफ्तर पहुंचा और अपने हाथों से हथियार पुलिस के सामने रख दिया। यह सिर्फ एक सरेंडर नहीं था, बल्कि एक लंबा और कठिन फैसला था। सरेंडर के दरम्यान मौके पर पलामू प्रक्षेत्र के आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा, लातेहार एसपी कुमार गौरव, एसएसबी 32 बटालियन और सीआरपीएफ 11 बटालियन के कमांडेंट सहित सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जंगल की जिंदगी और बढ़ता दबाव

बालूमाथ थाना क्षेत्र का रहने वाला आलोक यादव धीरे-धीरे नक्सल संगठन में आगे बढ़ा। जंगल, डर, हथियार और लगातार भागती जिंदगी उसकी पहचान बन गई। हर दिन पुलिस का दबाव, सुरक्षा बलों की मौजूदगी और लगातार सिमटता दायरा उसे यह सोचने पर मजबूर करता रहा कि यह रास्ता आखिर कहां ले जाएगा। करीबी लोगों के अनुसार आलोक अंदर ही अंदर टूट चुका था। परिवार से दूरी, सामान्य जिंदगी का छूटना और हर पल जान का खतरा उसकी मानसिक थकान बढ़ा रहा था।

जब हथियार बोझ बन गया

आलोक यादव शुक्रवार को जब वह एसपी कार्यालय के सभागार में पहुंचा, तो उसके हाथ में वही देसी कार्बाइन थी, जो कभी उसकी ताकत मानी जाती थी। वही हथियार अब उसके लिए बोझ बन चुका था। चार गोलियां सौंपते वक्त उसके चेहरे पर डर नहीं, बल्कि राहत साफ दिखाई दे रही थी। वह जानता था कि अब पीछे लौटने का रास्ता नहीं है, लेकिन आगे बढ़ने की एक उम्मीद जरूर है।

पुलिस का भरोसा और नई शुरुआत का वादा

लातेहार के पुलिस कप्तान कुमार गौरव ने मीडिया को बताया कि लगातार अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण नीति ने आलोक को यह भरोसा दिया कि वह मुख्यधारा में लौट सकता है। आत्मसमर्पण के बाद उसे नीति के तहत हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, ताकि वह नई जिंदगी की शुरुआत कर सके। यह भरोसा ही था जिससे एक इनामी नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हो गया। एसपी का कहना है कि आत्मसमर्पण का रास्ता अभी खुला है और जो लौटना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे बंद नहीं किए गए हैं। लातेहार पुलिस और सुरक्षा बलों का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाया जाए। इसके लिए अभियान भी जारी है और संवाद का रास्ता भी खुला रखा गया है।

35 संगीन कांडों में वांटेड PLFI के आलोक यादव ने डाला हथियार, लातेहार SP कुमार गौरव क्या बोल गये… देखें pic.twitter.com/Ta7lNEIO7i

— News Samvad (@newssamvaad) December 19, 2025

कभी उग्रवाद का था बोलबाला

यहां याद दिला दें कि लातेहार जिला कभी उग्रवाद के लिए जाना जाता था। लगातार हिंसा, डर और बंदूक के साए में यह इलाका लंबे समय तक रहा। लेकिन पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से हाल के वर्षों में हालात तेजी से बदले हैं। अब जिला शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।

मुठभेड़ और सरेंडर से टूटी उग्रवादी कमर

बीते दिनों लातेहार पुलिस ने एसपी कुमार गौरव की देखरेख में माओवादी और जेजेएमपी संगठन के तीन उग्रवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया। इसके साथ ही झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति “नई दिशा” के तहत अब तक 22 उग्रवादियों को मुख्यधारा में लाया गया है। इनमें कई बड़े और इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था।

बड़े इनामी नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

आत्मसमर्पण करने वालों में जेजेएमपी संगठन के सबजोनल और जोनल कमांडर शामिल हैं। इनमें लवलेश गंझू, रविंद्र यादव, अखिलेश यादव, बालदेव गंझू, मुकेश राम, ब्रजेश यादव, पवन महतो सहित कई नाम हैं। इन सभी पर एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक का इनाम था।

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