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Patna : पुलिस महकमे में अगर समय पर प्रमोशन और सही जिम्मेदारी मिले, तो जवानों का जोश अपने आप दोगुना हो जाता है। बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में इन दिनों कुछ ऐसा ही बदलाव साफ नजर आ रहा है। लंबे समय से फाइलों में अटकी पदोन्नति की प्रक्रिया को रफ्तार देकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि वे केवल कड़े फैसलों के लिए ही नहीं, बल्कि महकमे के निचले स्तर के सिपाहियों और अधिकारियों की सुध लेने के लिए भी जाने जाते हैं। इस साल 1 अप्रैल 2026 से लेकर अब तक पुलिस और गृह विभाग के विभिन्न संवर्गों में कुल 9,187 अधिकारियों और कर्मियों को प्रमोशन देकर कार्यकारी प्रभार सौंप दिया गया है।
थानेदारों और जांच अफसरों की फौज तैयार
किसी भी राज्य की कानून व्यवस्था की असली रीढ़ थाने का दारोगा और जमादार होता है। जब तक थानों में जांच अधिकारियों की पर्याप्त संख्या नहीं होगी, तब तक केस डायरी लिखने और मामलों के निपटारे में तेजी नहीं आ सकती। सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने इसी जमीनी हकीकत पर ध्यान केंद्रित किया। इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा फायदा उन कर्मियों को मिला जो लंबे समय से फील्ड में पसीना बहा रहे थे। सहायक अवर निरीक्षक यानी एएसआई से दारोगा के पद पर अकेले 6,800 जवानों को प्रमोशन का तोहफा मिला है। इसके साथ ही पीटीसी पास 1,545 सिपाहियों को जमादार की कमान सौंपी गई है और 79 जवानों को हवलदार बनाया गया है। वरिष्ठ स्तर पर भी प्रशासनिक कसावट लाते हुए 88 पुलिस निरीक्षकों को डीएसपी पद की नई जिम्मेदारी दी गई है, जिससे फील्ड सुपरविजन पहले से कहीं ज्यादा पुख्ता होगा।

तकनीकी और लॉजिस्टिक विंग को भी मिली नई ताकत
सड़क पर पेट्रोलिंग हो या किसी घटना के बाद मौके पर पहुंचना, तेज-तर्रार गाड़ियों और तकनीक के बिना आधुनिक पुलिसिंग अधूरी है। सरकार ने इस पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया। परिवहन संवर्ग में वाहनों के सुगम संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 218 चालकों को हवलदार, 107 को सहायक अवर निरीक्षक, 45 को दारोगा और 31 कर्मियों को पुलिस निरीक्षक पद का जिम्मा दिया गया है। वहीं तकनीकी और वायरलेस शाखा में 112 प्रा०अ०नि० को पुलिस निरीक्षक, 103 आशु स०अ०नि० को आशु दारोगा और 50 आयुधिक हवलदारों को आयुधिक अवर निरीक्षक के पद पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे साफ है कि सिर्फ गश्त ही नहीं, बल्कि संचार और हथियारों के रखरखाव वाली तकनीकी रीढ़ को भी उतना ही मजबूत बनाया गया है।
कागजी काम से लेकर फील्ड तक दिखा प्रशासनिक संतुलन
महकमे की प्रशासनिक मशीनरी को सुचारू रखने वाले ऑफिस स्टाफ को भी इस फेरबदल में बराबर का सम्मान मिला है। लिपिकीय संवर्ग में कार्यालय परिचारी से निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर पांच, निम्नवर्गीय लिपिक से उच्चवर्गीय लिपिक के पद पर दो और उच्चवर्गीय लिपिक से प्रधान लिपिक के पद पर एक कर्मी को नई जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री का यह सीधा संदेश माना जा रहा है कि काम करने वाले हर स्तर के कर्मी की मेहनत का मूल्यांकन होगा। जब फाइलें तेजी से बढ़ेंगी और जवानों को अपने करियर में आगे बढ़ने का रास्ता दिखेगा, तो उसका सीधा असर सड़क पर अपराध नियंत्रण और आम जनता की सुरक्षा के रूप में सामने आएगा।
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