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News Samvad : माइग्रेन एक तेज सिरदर्द की बीमारी है, जिसमें सिर दर्द के साथ मतली, रोशनी और आवाज से परेशानी, थकान और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, इसका मुख्य कारण महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं।
हार्मोन का माइग्रेन से गहरा संबंध
एक्सपर्ट के अनुसार, महिलाओं में एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन माइग्रेन को काफी प्रभावित करता है।
जब शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर अचानक गिरता या बढ़ता है, तब माइग्रेन का दौरा ट्रिगर हो सकता है।
किन स्थितियों में माइग्रेन ज्यादा होता है
महिलाओं को कुछ खास समय पर माइग्रेन की शिकायत ज्यादा होती है।
माहवारी से पहले एस्ट्रोजन का स्तर अचानक कम होता है, जिससे सिरदर्द शुरू हो सकता है।
किशोरावस्था में हार्मोन तेजी से बदलते हैं, इसलिए इस उम्र में माइग्रेन शुरू हो सकता है।
गर्भावस्था के बाद हार्मोन में बदलाव से माइग्रेन बढ़ सकता है।
मेनोपॉज के आसपास हार्मोन असंतुलन के कारण माइग्रेन के दौरे ज्यादा देखे जाते हैं।
गर्भावस्था में क्यों कम हो जाता है माइग्रेन
डॉक्टर बताते हैं कि गर्भावस्था के आखिरी महीनों में एस्ट्रोजन का स्तर स्थिर हो जाता है। इस वजह से कई महिलाओं में माइग्रेन के दौरे कम हो जाते हैं। हालांकि यह हर महिला में अलग हो सकता है।
महिलाओं में माइग्रेन के लक्षण ज्यादा गंभीर क्यों
महिलाओं में माइग्रेन के दौरे अक्सर लंबे समय तक चलते हैं।
मतली और उल्टी की शिकायत ज्यादा हो सकती है।
रोशनी और आवाज से परेशानी अधिक होती है।
कुछ गर्भनिरोधक गोलियां भी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं।
माइग्रेन का इलाज और देखभाल
माइग्रेन के इलाज में दर्द कम करने वाली दवाएं जैसे पैरासिटामोल और डॉक्टर द्वारा दी गई माइग्रेन से जुड़ी दवाएं शामिल होती हैं।
अगर माइग्रेन बार बार होता है, तो डॉक्टर रोकथाम के लिए रोज लेने वाली दवाएं या नई थेरेपी सुझा सकते हैं।
बिना दवा के राहत के तरीके
आराम करना और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज फायदेमंद हो सकती है।
रिलैक्सेशन तकनीक और तनाव कम करना जरूरी है।
समय पर सोना, हल्की एक्सरसाइज करना और पर्याप्त पानी पीना मदद करता है।
सिरदर्द की डायरी बनाकर यह समझा जा सकता है कि माइग्रेन किस वजह से होता है।
डॉक्टर से खुलकर बात करना क्यों जरूरी
लड़कियों और महिलाओं को माहवारी, गर्भावस्था और मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं पर डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए। सही जानकारी और सही इलाज से माइग्रेन को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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