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Ranchi : सुबह की हलचल थी। लोग अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे। किसी को दफ्तर की जल्दी थी, किसी को घर की। उसी सड़क के किनारे एक वृद्ध महिला चुपचाप पड़ी थी। न आवाज, न शिकायत। बस एक थका हुआ शरीर और बुझती हुई सांसें। शायद किसी की मां, किसी की दादी, लेकिन उस वक्त वह सिर्फ एक अनजान बुजुर्ग थी। उस महिला की आंखें खुली थीं, पर नजरें कहीं ठहरी हुई थीं। वह उठने की कोशिश कर रही थी, मगर शरीर साथ नहीं दे रहा था। लोग गुजरे, कुछ ने देखा, कुछ ने नजरें फेर लीं। तभी किस्मत ने करवट ली।
एक नजर, जिसने हालात बदल दिए
झालसा यानी झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना की नजर जब उस वृद्ध महिला पर पड़ी, तो यह कोई सामान्य दृश्य नहीं रहा। यह एक इंसान की पीड़ा थी, जो मदद मांग रही थी। निर्देश तुरंत जारी हुए और रांची डाला की टीम हरकत में आ गई। न्यायायुक्त सह अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा-1 ने आगे का टास्क डालसा सचिव राकेश रौशन को सौंपा। डालसा सचिव राकेश रौशन की देखरेख में टीम मौके पर पहुंची। वहां जो दृश्य था, वह दिल को झकझोर देने वाला था।
नाम, पता और पहचान से परे एक जीवन
बुजुर्ग महिला न तो ठीक से खड़ी हो पा रही थी, न ही अपना नाम या पता बता पा रही थी। शब्द जैसे उसके साथ छोड़ चुके थे। शरीर थका हुआ था और मन शायद लंबे समय से अकेला। डालसा टीम ने जरा भी देरी नहीं की। एंबुलेंस मंगाई गई। रांची के सिविल सर्जन से बात कर सदर अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया। उस पल किसी को यह नहीं पता था कि वह कौन है, कहां से आई है। लेकिन इतना जरूर था कि अब वह अकेली नहीं थी।
इलाज के साथ भरोसे की शुरुआत
सदर अस्पताल में महिला को दो दिनों के लिए भर्ती किया गया। डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज शुरू हुआ। हर सांस के साथ उसकी हालत में थोड़ा सुधार आया। हालांकि अब भी वह अपने घर का पता नहीं बता पा रही है। डालसा सचिव ने यह भी तय किया कि जब तक महिला की पहचान नहीं हो जाती, तब तक अस्पताल से छुट्टी के बाद उसे वृद्धा आश्रम में सुरक्षित रखा जाएगा। यह फैसला सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक है।
जब सिस्टम इंसान बन जाए
इस पूरी घटना में कोई कानूनी नोटिस नहीं, कोई लंबी प्रक्रिया नहीं थी। सिर्फ एक संवेदना थी, जिसने सिस्टम को इंसान बना दिया। डालसा सचिव राकेश रौशन ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई बुजुर्ग या असहाय शख्स इस तरह की हालत में दिखे, तो 15100 पर कॉल करें या डालसा कार्यालय में सूचना दें। क्योंकि कभी-कभी एक फोन कॉल किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है।
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