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Ranchi : रांची के सिविल कोर्ट परिसर में 14 मार्च 2026 को कुछ खास होने जा रहा है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सालों से अपने मामलों के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। किसी का बिजली बिल का विवाद है, तो किसी का चेक बाउंस का मामला। कोई सड़क हादसे में मुआवजा पाने की आस लगाए बैठा है, तो कोई पारिवारिक विवाद से परेशान है। ऐसे ही आम लोगों की परेशानियों को जल्दी और आपसी सहमति से सुलझाने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।
कागजों से निकलकर इंसानों की कहानी बनते मामले
कोर्ट में ये मामले फाइल नंबर हो सकते हैं, लेकिन इनके पीछे जिंदगियां जुड़ी होती हैं। रोजमर्रा की भागदौड़ में कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते लोग थक जाते हैं। कई बार खर्च इतना बढ़ जाता है कि न्याय दूर की चीज लगने लगती है। डालसा सचिव राकेश रौशन कहते हैं, “हम चाहते हैं कि लोग अदालत से डरें नहीं। लोक अदालत ऐसा मंच है, जहां बिना लंबी प्रक्रिया के, बातचीत से समाधान निकलता है। इससे समय भी बचता है और पैसा भी।”
गांव-गांव तक पहुंच रही इंसाफ की आवाज
लोक अदालत की जानकारी सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है। पंचायत और प्रखंड स्तर पर पीएलवी गांव-गांव जाकर लोगों को बता रहे हैं कि अगर उनका कोई मामला अदालत में लंबित है, तो 14 मार्च को उसका समाधान संभव है। पोस्टर लगाए जा रहे हैं, लोगों से सीधे बातचीत की जा रही है। कई ग्रामीणों के लिए यह पहली बार है जब उन्हें पता चला कि अदालत का फैसला सालों का इंतजार किए बिना भी हो सकता है।
एक दिन, कई तरह के विवादों का समाधान
इस लोक अदालत में आपराधिक सुलहनीय मामले, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, चेक बाउंस, बिजली बिल, ट्रैफिक चालान, भूमि अधिग्रहण, मोटर दुर्घटना दावा जैसे अनेक मामलों को शामिल किया गया है। डालसा की टीम पहले से ही मामलों की सूची बना रही है और पक्षकारों को नोटिस भेजे जा रहे हैं ताकि वे तैयार होकर आएं और उसी दिन समाधान हो सके।

जब कानून बच्चों की ढाल बनता है
इसी बीच, इंसाफ की यह मुहिम अदालत की चारदीवारी से बाहर भी निकल रही है। 19 जनवरी 2026 को खेलारी प्रखंड के मायापुर पंचायत भवन में बाल विवाह के खिलाफ एक जागरूकता कार्यक्रम हुआ। यह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के आशा अभियान के तहत आयोजित किया गया।
छोटी उम्र, बड़े सपने
कार्यक्रम में मौजूद कई बच्चियां स्कूल की वर्दी में थीं। उनकी आंखों में सपने थे, डॉक्टर बनने के, शिक्षक बनने के, अपने पैरों पर खड़े होने के। डालसा के पीएलवी ने उन्हें समझाया कि बचपन में शादी नहीं, बल्कि पढ़ाई उनका अधिकार है। मुखिया पुष्पा खलखो और पंचायत सचिव विपिन वर्मा ने भी ग्रामीणों से अपील की कि बेटियों को बोझ नहीं, भविष्य समझें।
इंसाफ सिर्फ फैसला नहीं, भरोसा भी है
डालसा सचिव राकेश रौसन ने का कहना है कि लोक अदालत और ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बताते हैं कि न्याय सिर्फ कानून की भाषा में नहीं होता, बल्कि भरोसे और समझ से भी होता है। 14 मार्च को रांची की अदालत में शायद कई फाइलें बंद होंगी, लेकिन असल में कई घरों में चैन की नींद लौटेगी, कई परिवारों में मुस्कान आएगी और कई बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिलेगी। यही लोक अदालत की असली ताकत है, इंसाफ को इंसान के करीब लाना।
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