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Ranchi : 26 जनवरी की सुबह झारखंड पुलिस मुख्यालय का प्रांगण तिरंगे की छांव में सजा हुआ था। परेड के बीच खड़े पुलिसकर्मियों की आंखों में सिर्फ अनुशासन नहीं, जिम्मेदारी का भाव भी साफ दिख रहा था। इसी माहौल में 77वें गणतंत्र दिवस पर डीजीपी तदाशा मिश्रा ने तिरंगा फहराने के बाद जब बोलना शुरू किया, तो उनका संबोधन सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उस मेहनत और संघर्ष की कहानी बन गया, जो वर्दी पहनकर रोज निभाई जाती है। उन्होंने सबसे पहले पुलिसकर्मियों, उनके परिवारों और आम लोगों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। यह संदेश था कि सुरक्षा की यह लड़ाई अकेले पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।

नक्सल मोर्चे पर रातें जागते जवान
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने नक्सल विरोधी अभियानों का जिक्र करते हुए बताया कि साल 2025 में 326 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई, 38 ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया और 32 मुठभेड़ में मारे गए। इन आंकड़ों के पीछे उन जवानों की कहानी छिपी है, जो जंगलों में महीनों डटे रहे, त्योहारों पर घर नहीं लौट पाए और हर सुबह इस भरोसे के साथ निकले कि शाम को शांति लौटेगी।
संगठित अपराध पर सख्त, जनता के लिए नरम
एटीएस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए डीजीपी ने बताया कि 30 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत-तहरीर के सदस्य भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन आम नागरिकों के लिए पुलिस हमेशा संवेदनशील और सहयोगी बनी रहेगी।

नशे के खिलाफ जंग
डीजीपी ने नशे के कारोबार पर हुई कार्रवाई को सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि समाज के भविष्य से जुड़ा सवाल बताया। 706 मामलों में 883 लोगों की गिरफ्तारी और 58.77 करोड़ रुपये की जब्ती के पीछे उद्देश्य साफ था, युवाओं को उस रास्ते से बचाना, जहां से लौटना मुश्किल हो जाता है।
साइबर अपराध से ठगे गए लोगों की उम्मीद बनी पुलिस
साइबर अपराध पर बात करते हुए डीजीपी का लहजा थोड़ा भावुक हो गया। उन्होंने बताया कि 2025 में 1413 मामलों में न सिर्फ आरोपियों को पकड़ा गया, बल्कि 1.48 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए। कई मामलों में ठगी का शिकार हुए लोग जब पैसा वापस पाकर थाने से लौटे, तो उनकी आंखों में राहत साफ नजर आई। यही पुलिस की सबसे बड़ी जीत है।
जन शिकायत समाधान, पुलिस और जनता के बीच सेतु
सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर शुरू हुए जन शिकायत समाधान कार्यक्रमों को डीजीपी ने भरोसे की पहल बताया। गांव से शहर तक, लोगों की शिकायतें सुनी गईं और मौके पर समाधान की कोशिश हुई। इससे यह संदेश गया कि पुलिस सिर्फ डर का नहीं, भरोसे का नाम भी है।
संविधान की ताकत से सुरक्षित झारखंड का सपना
अपने संबोधन के अंत में डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें संविधान के मूल्यों की याद दिलाता है। कानून, न्याय और समानता ही पुलिस की असली ताकत है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे इसी भावना के साथ झारखंड को अपराध और नक्सल मुक्त राज्य बनाने के लिए काम करते रहें।
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