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Gaya (Raju Prasad) : सुबह की ठंडी हवा, हाथों में तिरंगा और आंखों में गर्व। गया के धनिया बगीचा इलाके में 26 जनवरी की यह सुबह कुछ अलग थी। यह सिर्फ झंडा फहराने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन महिलाओं की कहानी थी, जिन्होंने सीमित साधनों से आत्मनिर्भरता की राह बनाई और आज संविधान की ताकत को जीकर दिखा रही हैं। थाना डेल्हा अंतर्गत वार्ड संख्या 27 में स्थित शिवा महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति परिसर में 77वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था। जैसे ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, वहां मौजूद हर महिला की आंखों में सम्मान और जिम्मेदारी का भाव साफ झलक रहा था।
जब संविधान सिर्फ किताब नहीं, जिंदगी बन जाता है
समिति की अध्यक्ष शिला देवी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संविधान उनके लिए सिर्फ कानूनों की किताब नहीं है, बल्कि वह आधार है, जिसने उन्हें पहचान और हक दिया। उन्होंने याद दिलाया कि 26 जनवरी का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझने का अवसर देता है। शिला देवी की आवाज में अनुभव झलक रहा था। वह कहती हैं कि पहले महिलाएं अपने फैसले खुद नहीं ले पाती थीं, लेकिन आज आजीविका दीदियों के रूप में वे अपने परिवार और समाज दोनों को संभाल रही हैं।

तिरंगे के नीचे लिया गया जिम्मेदारी का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने देश की एकता, सामाजिक सौहार्द और विकास के लिए लगातार काम करने का संकल्प लिया। यह संकल्प मंच से दिया गया भाषण नहीं था, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा वादा था। छोटी बचत, समूह की बैठकों और मेहनत से कमाए गए आत्मविश्वास की ताकत इसमें शामिल थी। एक दीदी ने धीमी आवाज में कहा, “हम अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, हम देश के काम में भी हिस्सेदार हैं।”
राष्ट्र निर्माण में जमीनी योगदान
गया की आजीविका दीदियां शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के क्षेत्र में लगातार काम कर रही हैं। छोटे कारोबार से लेकर जरूरतमंद परिवारों की मदद तक, उनका योगदान भले ही सुर्खियों में न हो, लेकिन देश की नींव को मजबूत करता है। कार्यक्रम में सचिव द्रौपदी देवी, कोषाध्यक्ष मीणा गुप्ता सहित पुनम कुमारी, कुंती देवी, सिमरन कुमारी, निरू देवी, पुष्पांजली कुमारी, ममता कुमारी, सुरभी कुमारी, शारदा देवी, माया देवी और ज्योति कुमारी मौजूद रहीं। सभी ने एक स्वर में संस्था के लक्ष्यों को पूरा करने का संकल्प दोहराया।

तिरंगे को सलाम, भविष्य की ओर उम्मीद
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और तिरंगे को सलाम के साथ हुआ। उस पल यह साफ महसूस हुआ कि गणतंत्र दिवस इन महिलाओं के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि अपने सपनों, अधिकारों और जिम्मेदारियों को नए सिरे से समझने का अवसर है।

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