अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Jamtara (Aftab) : शनिवार का दिन जिला व्यवहार न्यायालय परिसर के लिए भावनाओं से भरा रहा। वर्षों तक न्याय व्यवस्था का मजबूत स्तंभ रहे लोक अभियोजक भोला दास जब अपनी सेवा यात्रा पूरी कर विदा ले रहे थे, तो हर आंख नम थी और हर चेहरे पर सम्मान की मुस्कान। करीब तीन दशक तक न्यायालय के गलियारों में गूंजती उनकी मजबूत आवाज, फाइलों के बीच झुका उनका शांत चेहरा और अदालत में कानून की ठोस दलीलें… अब यादों का हिस्सा बनने जा रही हैं। लेकिन यह विदाई नहीं, बल्कि उनके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है।
साधारण परिवार से न्याय के शिखर तक
भोला दास का सफर किसी सपने से कम नहीं रहा। साधारण परिवार में जन्मे भोला दास ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई पूरी की और कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन को उन्होंने जीवन का मंत्र बनाया। उन्होंने हमेशा कहा, “न्याय केवल कानून से नहीं, संवेदना से भी मिलता है।” यही सोच उन्हें एक सफल और लोकप्रिय लोक अभियोजक बनाती रही।
अदालत से आगे भी निभाई जिम्मेदारी
भोला दास सिर्फ एक सरकारी वकील नहीं थे, बल्कि पीड़ितों के लिए सहारा और युवाओं के लिए मार्गदर्शक भी थे। कई बार गरीब और असहाय लोगों की मदद बिना किसी स्वार्थ के करते रहे। कई अधिवक्ताओं का कहना है कि उन्होंने कभी पद या प्रतिष्ठा का घमंड नहीं किया। वे हमेशा जूनियर वकीलों को समझाते, हौसला बढ़ाते और सही रास्ता दिखाते थे।

जब विदाई बनी यादगार पल
विदाई समारोह के दौरान जब नई प्रभारी लोक अभियोजक सोनी कुमारी ने उन्हें शॉल और बुके भेंट किया, तो भोला दास की आंखों में भावुकता साफ झलक रही थी। मंच से बोलते समय उनका स्वर कई बार भर आया। उन्होंने कहा, “यह नौकरी नहीं, मेरा जीवन था। आप सभी के साथ बिताया हर पल मेरे लिए अनमोल है।”
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव और एसपी राजकुमार मेहता ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि भोला दास ने हमेशा न्याय और सत्य का साथ दिया।
सहकर्मियों की आंखों में सम्मान
समारोह में मौजूद न्यायिक अधिकारी, वकील और कर्मचारी जब उनके बारे में बोल रहे थे, तो हर शब्द में सम्मान और अपनापन झलक रहा था। किसी ने उन्हें “न्याय का प्रहरी” कहा, तो किसी ने “मार्गदर्शक गुरु”। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन लाल बरनवाल ने कहा, “भोला दास जैसे लोग पद छोड़ते हैं, लेकिन दिलों से कभी विदा नहीं होते।”
अब जीवन की दूसरी पारी
सेवानिवृत्ति के बाद भोला दास अब परिवार और समाज के लिए अधिक समय देना चाहते हैं। वे युवाओं को कानून की बारीकियां सिखाने और सामाजिक कार्यों से जुड़ने की इच्छा रखते हैं। उनका मानना है कि
“सेवा कभी खत्म नहीं होती, बस उसका तरीका बदल जाता है।”
जामताड़ा की न्याय व्यवस्था ने एक मजबूत स्तंभ को विदा किया है, लेकिन उनके संस्कार, मूल्य और योगदान हमेशा जीवित रहेंगे।
इसे भी पढ़ें : धूल, दबाव और दर्द… हादसे के बाद सवालों के घेरे में NTPC-PVUNL की सुरक्षा व्यवस्था



