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Ranchi : राजधानी रांची के होटल ब्लू शिवालिक में शनिवार को सिर्फ एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं हुआ, बल्कि स्वर्णकार समाज की एकता, सामाजिक चेतना और संगठनात्मक ताकत का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। झारखंड के अलग-अलग जिलों से पहुंचे सैकड़ों प्रतिनिधियों, सर्राफा व्यवसायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि अब स्वर्णकार समाज अपने अधिकारों, सम्मान और भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा सजग और संगठित है। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर लोगों का आना शुरू हो गया था। पारंपरिक परिधान और उत्साह से भरे समाजबंधुओं की मौजूदगी ने माहौल को खास बना दिया। हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी कि समाज को एक मंच पर लाने और आने वाली पीढ़ी को मजबूत दिशा देने का समय आ गया है।
जब एक मंच पर दिखी समाज की ताकत
कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। भगवान श्री संत शिरोमणि नरहरी जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर समाज के वरिष्ठ लोगों ने आयोजन का शुभारंभ किया। इसके बाद जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, वैसे-वैसे लोगों की भागीदारी और उत्साह भी बढ़ता गया। हॉल में मौजूद लोगों की संख्या यह बताने के लिए काफी थी कि समाज अब सिर्फ सामाजिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी पहचान और भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता है।

शपथ के साथ जिम्मेदारियों का भी एहसास
समारोह का सबसे अहम हिस्सा नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण रहा। नए पदाधिकारियों ने संगठन और समाज के हित में काम करने का संकल्प लिया। मंच से बार-बार यह बात दोहराई गई कि पद सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। समाज के लोगों का मानना है कि मजबूत नेतृत्व और संगठित प्रयासों से ही समाज की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है। यही वजह रही कि शपथ ग्रहण के दौरान पूरे हॉल में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
सम्मानित हुए वे लोग जिन्होंने समाज को आगे बढ़ाया
कार्यक्रम में उन लोगों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने वर्षों से समाज और संगठन के लिए काम किया है। सम्मान पाने वालों में वरिष्ठ समाजसेवी, व्यवसायी और सक्रिय सदस्य शामिल थे। सम्मान समारोह के दौरान कई बार तालियों की गूंज सुनाई दी। लोगों का कहना था कि ऐसे सम्मान दूसरों को भी समाज सेवा के लिए प्रेरित करते हैं और संगठन को मजबूत बनाते हैं।
समाज की राजनीति और भागीदारी पर भी हुई चर्चा
मंच से वक्ताओं ने साफ कहा कि किसी भी समाज की ताकत उसकी संख्या से नहीं, बल्कि उसकी एकजुटता से तय होती है। उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में स्वर्णकार समाज की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के लोगों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिक्षा, प्रशासन, राजनीति और सामाजिक नेतृत्व में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। इससे समाज की आवाज और प्रभाव दोनों मजबूत होंगे।
युवाओं के लिए भी दिया गया खास संदेश
कार्यक्रम का एक बड़ा केंद्र युवाओं को लेकर भी रहा। वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय में केवल पारंपरिक व्यवसाय पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, ज्वेलरी डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग और उद्यमिता से जोड़ना होगा। उनका कहना था कि आज का दौर कौशल और नवाचार का है। अगर नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक और नए अवसरों को अपनाती है तो समाज आर्थिक रूप से और मजबूत हो सकता है।
“एक ध्वज, एक पहचान” बना पूरे कार्यक्रम का संदेश
पूरे समारोह में जिस नारे की सबसे ज्यादा चर्चा रही, वह था “एक ध्वज, एक पहचान”। वक्ताओं ने इसे सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला संकल्प बताया। उनका कहना था कि जब तक समाज के लोग अलग-अलग समूहों में बंटे रहेंगे, तब तक सामूहिक ताकत का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए जरूरत है कि सभी लोग एक मंच पर आकर समाज के हित में मिलकर काम करें।
नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का भरोसा
कार्यक्रम के अंत में संगठन के पदाधिकारियों ने समाज के सामाजिक उत्थान, आर्थिक सशक्तिकरण और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए लगातार काम करने का संकल्प दोहराया। पूरे आयोजन ने यह संकेत दिया कि स्वर्णकार समाज अब अपने भविष्य को लेकर नई सोच और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना चाहता है।
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