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Pakur (Jaydev Kumar) : रविवार की शाम पाकुड़ के संत डॉन बॉस्को स्कूल का प्रांगण सिर्फ रोशनी और सजावट से ही नहीं, बच्चों की मुस्कान और अभिभावकों की चमकती आंखों से भी जगमगा रहा था। वार्षिक समारोह के बहाने यहां सपनों, मेहनत और आत्मविश्वास का ऐसा संगम दिखा, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। मंच के पीछे खड़े छोटे-छोटे बच्चे अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। किसी के हाथ में प्रॉप्स थे, कोई अपनी ड्रेस ठीक कर रहा था, तो कोई आखिरी बार डायलॉग दोहरा रहा था। वहीं सामने बैठे माता-पिता अपने मोबाइल कैमरे तैयार रखे थे। जैसे ही पर्दा उठा, तालियों की गूंज ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया।
मेहनत का रंग मंच पर दिखा
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत नृत्य प्रस्तुति से हुई। पारंपरिक से लेकर आधुनिक गीतों पर बच्चों ने ऐसा आत्मविश्वास दिखाया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। हर स्टेप में अभ्यास की झलक साफ दिख रही थी। नृत्य शिक्षक श्री राजा और नसरिन की मेहनत मंच पर उतर आई थी। एक अभिभावक ने कहा, “बच्चों को इस तरह मंच पर देखना हमारे लिए गर्व की बात है। उनकी हिम्मत और आत्मविश्वास देखकर दिल खुश हो जाता है।” नाटक की प्रस्तुति में बच्चों ने सामाजिक संदेश भी दिया। छोटे-छोटे कलाकार जब गंभीर संवाद बोल रहे थे, तो हॉल में सन्नाटा छा गया। यह सिर्फ अभिनय नहीं था, बल्कि उनके भीतर पनपती समझ और संवेदनशीलता की झलक थी।

कराटे प्रदर्शन ने भरी ऊर्जा
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक पल तब आया जब कराटे प्रशिक्षक शमोजम्मिल अंसारी के निर्देशन में विद्यार्थियों ने कराटे का प्रदर्शन किया। उनके हर मूव पर दर्शकों की सांसें थम जातीं और फिर तालियों की गूंज से माहौल भर उठता। यह सिर्फ खेल नहीं था, बल्कि आत्मरक्षा और अनुशासन का संदेश भी था।
जब मंच से मिली प्रेरणा
समारोह में जिले के उपायुक्त मनीष कुमार, DSO राहुल कुमार, DPS के प्रधानाचार्य और K.K.M. कॉलेज, पाकुड़ के प्रधानाचार्य युगल किशोर झा मौजूद रहे। अपने संबोधन में उन्होंने बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने की सलाह दी। विद्यालय के प्रधानाचार्य शिव शंकर दुबे और उप-प्रधानाचार्य अजय कुमार त्रिवेदी ने भी बच्चों की मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्कूल का उद्देश्य सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि हर बच्चे के व्यक्तित्व को संवारना है।

एंकरिंग और संगीत ने जोड़ा दिलों को
कार्यक्रम की एंकरिंग रणबीर कुमार लाल और सुमित पंडित ने संभाली। दोनों ने पूरे समारोह को सहज और रोचक बनाए रखा। खासकर जब रणबीर कुमार लाल ने अपनी मधुर आवाज में गीत सुनाया, तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। कई अभिभावक उस पल को अपने कैमरे में कैद करते नजर आए।

टीमवर्क से बनी यादगार शाम
इस भव्य आयोजन के पीछे स्कूल के शिक्षकों और स्टाफ का महीनों का परिश्रम छिपा था। कार्यालय स्टाफ पिंकी, राकेश और आरती ने सभी औपचारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। वहीं पिंकी, संध्या, बिनय, हिमांशु, रवि, शिवा, प्रीतिलता, रणबीर, आरती, सुजीत, बबीता, सोमा, प्रकाश, पूर्वाशा, सुमित, पिया, सोमनाथ, राकेश, पंकज, रुमा, कौशल और अफरीन सहित सभी का योगदान इस शाम को सफल बनाने में अहम रहा।

तालियों में छिपी थी एक संतुष्टि
समापन के वक्त जब पूरे हॉल में तालियां गूंज रही थीं, तो वह सिर्फ एक कार्यक्रम के खत्म होने की आवाज नहीं थी। वह उन बच्चों की मेहनत की स्वीकृति थी, जिन्होंने डर पर जीत पाई, मंच पर कदम रखा और अपने भीतर छिपे हुनर को दुनिया के सामने रखा। संत डॉन बॉस्को स्कूल का यह वार्षिक समारोह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि बच्चों के सपनों को उड़ान देने वाली एक यादगार शाम बन गया।
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