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Ranchi : झारखंड में आतंक और रंगदारी का खेल खेलने वाले प्रतिबंधित संगठन PLFI को बड़ा झटका लगा है। NIA की विशेष अदालत ने संगठन के छह सक्रिय सदस्यों को 10-10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने साफ कहा कि ये लोग सिर्फ संगठन के नाम पर नहीं, बल्कि हथियारों के दम पर इलाके में डर का माहौल बना रहे थे और लेवी वसूली कर रहे थे।
क्या था पूरा मामला
मामला दिसंबर 2018 का है। लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र के तितिर महुआ जंगल में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि PLFI के हथियारबंद सदस्य बैठक कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया। छापेमारी के दौरान चार आरोपी मौके से पकड़े गए। उनके पास से दो विदेशी राइफलें, भारी मात्रा में गोलियां, सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए। बाद में जांच के दौरान दो और लोगों की गिरफ्तारी हुई।
NIA ने संभाली जांच
जून 2019 में यह मामला एनआईए ने अपने हाथ में लिया। एजेंसी ने गहराई से जांच की और फरवरी 2020 में छहों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल के दौरान एनआईए ने अदालत में ऐसे पुख्ता सबूत पेश किए, जिससे साफ हो गया कि आरोपी न सिर्फ अवैध हथियार जुटा रहे थे, बल्कि इलाके में दहशत फैलाकर लेवी भी वसूल रहे थे।
कौन-कौन हैं दोषी
सजा पाने वालों में गुलाब कुमार यादव, रवि यादव, राकेश कुमार पासवान, पवन कुमार यादव, संतोष यादव और सुरेश यादव शामिल हैं। जांच में पता चला कि संतोष यादव लातेहार और चतरा जिलों में PLFI का सब-जोनल कमांडर था। वह नए युवाओं की भर्ती करता था और संगठन की गतिविधियों को दिशा देता था। वहीं, सुरेश यादव ओवर ग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करता था और अवैध हथियार और गोला-बारूद की सप्लाई में अहम कड़ी था।
अदालत का सख्त संदेश
रांची की NIA की विशेष अदालत ने IPC, UAPA और आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम की धाराओं के तहत सभी छह आरोपियों को अधिकतम 10 साल की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि ये गतिविधियां संगठित आतंक और आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा थीं।
PLFI को बड़ा झटका
जांच एजेंसी का कहना है कि यह फैसला PLFI के नेटवर्क पर सीधा प्रहार है। लंबे समय से यह संगठन झारखंड के कुछ इलाकों में लेवी और हथियारों के दम पर अपना असर बनाए रखने की कोशिश कर रहा था। अब अदालत के इस फैसले से साफ संदेश गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, और आतंक व रंगदारी के खेल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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