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Pakur (Jaydev Kumar) : सुबह की हल्की धूप के बीच पुराना सदर अस्पताल की ओर आते ही एक अलग ही उत्साह नजर आ रहा था। लोग हाथों में दस्ताने और मास्क पहने, शांत पर दृढ़ भाव से लाइन में खड़े थे। आज जिले भर में ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के तहत आयोजित रक्तदान शिविर में हिस्सा लेने के लिए आम लोग, कर्मचारी और स्वयंसेवक एकजुट होकर आए थे।
“जीवन देने का मौका”
डीसी मनीष कुमार खुद भी इस अवसर पर पहुंचे। उन्होंने अपना 24वां रक्तदान कर दिखाया। हाथ में सुई की हल्की चुभन के बावजूद उनके चेहरे पर संतोष और गर्व झलक रहा था। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, “रक्तदान केवल एक दान नहीं है, यह किसी जरूरतमंद को नई जिंदगी देने का अवसर है। हर एक बूंद रक्त किसी की मौत को टाल सकती है।” उनकी बातों में सहजता और सच्चाई थी। सामने बैठे युवाओं की आंखों में उत्सुकता और संकल्प दोनों नजर आ रहे थे।
छोटे कदम, बड़ा असर
सीएचसी हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा और महेशपुर में भी लोग अपने-अपने समय पर पहुंचे। कुछ बुजुर्ग थे, जो अपने अनुभवों के जरिए दूसरों को प्रेरित कर रहे थे। कुछ नए रक्तदाता पहली बार यहां आए थे और शुरुआत में थोड़ी घबराहट थी, लेकिन एक बार डोनेशन शुरू होने के बाद चेहरों पर राहत और गर्व झलक गया। एक महिला ने बताया, “पहली बार रक्तदान कर रही हूं। शुरुआत में डर था, लेकिन अब लगता है कि मैंने किसी की जिंदगी बचाई। यही सबसे बड़ा सुख है।” दर्जनों लोगों ने स्वैच्छिक रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। जिला स्तर के अधिकारी और स्वयंसेवक लगातार लोगों की मदद करते रहे, उन्हें राहत देते और प्रेरित करते रहे।
हर माह का वादा
डीसी मनीष कुमार ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के तहत हर माह 24 तारीख को नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। उनका कहना था, “हमारा मकसद है कि जिले में कभी भी रक्त की कमी न हो। हर स्वस्थ नागरिक को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए। यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी है और सबसे बड़ी मानव सेवा भी।” अंत में, जब लोग प्रमाण पत्र और कॉफी मग लेकर वापस जा रहे थे, उनके चेहरों पर संतोष और गर्व दोनों झलक रहे थे। आज की छोटी सी पहल ने दिखा दिया कि जब समाज एकजुट होता है तो मानवता की सबसे बड़ी मिसाल सामने आती है।
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