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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ के टायर मोड़ स्थित बालिका गृह में सोमवार का दिन बाकी दिनों जैसा नहीं था। सुबह से ही वहां हलचल थी, लेकिन यह कोई सामान्य गतिविधि नहीं थी। 12 साल की ज्योति कुमारी आज अपने जीवन की सबसे बड़ी यात्रा पर निकलने वाली थी। एक ऐसी यात्रा, जो उसे रामगढ़ से हजारों किलोमीटर दूर इटली ले जाएगी, जहां उसका इंतजार कर रहे थे उसके नए माता-पिता।
इंतजार, उम्मीद और एक नई शुरुआत
ज्योति अब तक डिवाइन ओंकार मिशन के बालिका गृह में रह रही थी। यहां उसे खाना, पढ़ाई और देखभाल तो मिलती थी, लेकिन हर बच्चे की तरह उसके मन में भी एक घर, मां और पिता की चाह थी। कई बार वह चुपचाप बैठकर अपने भविष्य के बारे में सोचती थी। सोमवार को जब उसे बताया गया कि इटली के दंपत्ति क्लाउडिया पेद्रिनी और डोमिंगा सेल्विनी ने उसे गोद लेने की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, तो पहले तो उसे यकीन ही नहीं हुआ। फिर धीरे-धीरे उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई।
कागजी प्रक्रिया से लेकर दिल के रिश्ते तक
अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण कोई आसान प्रक्रिया नहीं होती। जिला बाल संरक्षण इकाई और प्रशासन की देखरेख में हर दस्तावेज की बारीकी से जांच की गई। काउंसलिंग हुई, कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं और यह सुनिश्चित किया गया कि बच्ची का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो। उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज ने इस मौके पर कहा कि दत्तक ग्रहण केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं है, यह एक बच्चे को नया जीवन देने का माध्यम है। उन्होंने ज्योति से बातचीत की, उसका हौसला बढ़ाया और नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
विदाई के समय छलक पड़े आंसू
जब ज्योति अपने नए माता-पिता के साथ जाने लगी तो बालिका गृह का माहौल भावुक हो गया। जिन दीवारों के बीच उसने कई साल बिताए, जिन दीदियों के साथ खेली, पढ़ी और हंसी, उन्हें छोड़ना आसान नहीं था। बालिका गृह की एक कर्मचारी ने कहा, “हमने इसे बेटी की तरह पाला है। आज इसे नया परिवार मिल रहा है, इससे बड़ी खुशी क्या होगी। लेकिन विदाई के वक्त दिल भर आता है।” ज्योति ने भी जाते-जाते अपने दोस्तों को गले लगाया। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन उनमें डर से ज्यादा उम्मीद थी।
प्रशासन की भूमिका और एक संदेश
इस मौके पर उप विकास आयुक्त आशीष अग्रवाल, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी शांति बागे और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत होनी चाहिए, ताकि बच्चे का सर्वोत्तम हित सुरक्षित रहे। यह दत्तक ग्रहण सिर्फ एक बच्ची की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि अगर सही प्रक्रिया अपनाई जाए और प्रशासनिक सहयोग मिले, तो अनाथ और परित्यक्त बच्चों को भी नया परिवार और सुरक्षित भविष्य मिल सकता है।
अब इटली में नया जीवन
अब ज्योति एक नए देश, नई भाषा और नए माहौल में कदम रखने जा रही है। उसके सामने चुनौतियां होंगी, लेकिन साथ ही अवसर भी होंगे। बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सबसे बढ़कर मां-बाप का प्यार। रामगढ़ के इस छोटे से बालिका गृह से निकलकर ज्योति अब दुनिया के दूसरे कोने में अपनी नई कहानी लिखेगी। यहां के लोगों की दुआएं उसके साथ हैं। सभी को भरोसा है कि वह अपने नए जीवन में मुस्कुराते हुए आगे बढ़ेगी और एक दिन अपने अतीत को ताकत बनाकर नई पहचान बनाएगी।
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