अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : रांची के हटिया रेलवे स्टेशन की हलचल आम थी। लोग अपनी-अपनी मंजिल की तरफ दौड़ रहे थे। इसी बीच, आरपीएफ की टीम ने एक कोच में ध्यान खींचा। तीन नाबालिग लड़के और उनके साथ एक बड़ा आदमी। किसी ने सोचा नहीं होगा कि यही पल उनके जीवन की दिशा बदलने वाला था।
मासूमों की आंखों में डर
जैसे ही पूछताछ शुरू हुई, लड़कों की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। वे कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि यह आदमी उनके साथ क्यों है और उन्हें कहां ले जा रहा है। पूछताछ में सामने आया कि बिहार के लखीसराय का रहनेवाला अरुण राम (38 साल) बच्चों को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में काम दिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले जा रहा था। बच्चों को प्रति माह 10,000 रुपये मजदूरी का लालच दिया गया था। एक छोटे से बच्चे के मुख से हौले से बस इतना निकला… “मम्मी-पापा को पता नहीं है कि हम यहां हैं।” ये शब्द सुनकर आरपीएफ की टीम को तुरंत समझ आ गया कि समय पर हस्तक्षेप जरूरी है।
आरोपी की योजना फेल
आरपीएफ ने बच्चों और संदिग्ध को ट्रेन से उतारा। तलाशी में उसके पास से मोबाइल, रेलवे टिकट और अन्य दस्तावेज बरामद हुए। ये सब प्रमाण यह दिखा रहे थे कि यह सिर्फ एक साधारण यात्रा नहीं, बल्कि मानव तस्करी की साजिश थी।
बचपन को लौटाया गया
अभियान की सफलता के बाद अरुण राम को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई के लिए AHTU कोतवाली रांची को सौंप दिया गया। वहीं, तीनों बच्चों को सुरक्षित बालाश्रय रांची भेजा गया। बच्चों को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्हें उनकी दुनिया वापस मिल गई हो।
टीम की मेहनत रंग लाई
इस कामयाब अभियान में आरपीएफ पोस्ट हटिया के निरीक्षक रूपेश कुमार, अपराध शाखा रांची के इंस्पेक्टर, महिला सुरक्षा सेल रांची की इंस्पेक्टर एस आर कूजऊर और सब इंस्पेक्टर सूरज राजबंशी की मेहनत और सतर्कता साफ दिखी।
इसे भी पढ़ें : किसकी है ये कोख, किसका है ये दर्द… दो विक्षिप्त बेनाम जिंदगियों का डालसा का सहारा



