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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ जिले के भुरकुंडा इलाके के बीचा पंचायत स्थित सालगो खुदिया टोला का एक छोटा सा घर इन दिनों गहरे सन्नाटे में डूबा हुआ है। इस घर के मुखिया रामवृक्ष बेदिया (41) पिछले 42 दिनों से लापता हैं। रोजी-रोटी कमाने के लिए वे दिल्ली के पास गुड़गांव गए थे। जाते वक्त उन्होंने परिवार से कहा था कि “कुछ दिन में काम मिल जाएगा, फिर पैसे भी भेजूंगा।” लेकिन वह दिन आज तक नहीं आया। अब घर के दरवाजे पर हर आहट पर परिवार की निगाह टिक जाती है। पत्नी आरती देवी को उम्मीद है कि शायद एक दिन अचानक दरवाजा खुलेगा और उनके पति सामने खड़े मिलेंगे।
पांच बच्चों का सहारा था एक मजदूर पिता
रामवृक्ष कोई बड़ा कारोबारी या नौकरीपेशा व्यक्ति नहीं थे। वे एक साधारण मजदूर थे, जो पिछले करीब 20 वर्षों से मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। उनके कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। घर में पांच बच्चे हैं… चार बेटियां और एक बेटा। दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियां और एक बेटा अभी घर पर ही रहते हैं। पत्नी आरती देवी बताती हैं कि “हमारा पूरा घर उन्हीं की कमाई से चलता था। अब समझ नहीं आ रहा कि बच्चों को कैसे पालें और घर कैसे चलेगा।”
गांव के ही युवक ने दिया था काम का भरोसा
परिजनों के मुताबिक गांव के ही तिलका बेदिया ने रामवृक्ष को गुड़गांव में काम दिलाने का भरोसा दिया था। 29 जनवरी को दोनों पतरातू स्टेशन से ट्रेन पकड़कर दिल्ली के लिए रवाना हुए। 31 जनवरी की रात दोनों दिल्ली पहुंचे और स्टेशन पर ही रात गुजारी। उस रात रामवृक्ष ने घर फोन कर बताया था कि सब ठीक है। परिवार को लगा कि अब जल्द ही काम मिल जाएगा और सब ठीक हो जाएगा।
अचानक शुरू हुई परेशानी
अगले दिन जिस व्यक्ति से काम को लेकर बात हो रही थी, उसका फोन बंद हो गया। दोनों काफी देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। आखिरकार दोनों ने वापस घर लौटने का फैसला किया। दिल्ली स्टेशन पर उन्हें झारखंड जाने वाली ट्रेन नहीं मिली, इसलिए वे गोरखपुर जाने वाली ट्रेन की जानकारी लेने लगे।
रास्ते में हुई छिनतई
इसी दौरान एक अंजान व्यक्ति उनसे बातचीत करने लगा। थोड़ी देर बाद एक ऑटो आया, जिसमें पहले से दो लोग बैठे थे। दोनों मजदूरों को ऑटो में बैठाकर सुनसान जगह ले जाया गया, जहां उनसे छिनतई कर ली गई। रामवृक्ष के पास से करीब 1500 रुपये और तिलका बेदिया का मोबाइल छीन लिया गया। किसी तरह दोनों वापस दिल्ली स्टेशन पहुंचे और गोरखपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए।
ट्रेन में साथ था… फिर अचानक गायब
तिलका बेदिया के अनुसार ट्रेन में बैठने के बाद उन्हें पता चला कि जिन लोगों ने छिनतई की थी, वे भी उसी बोगी में मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने दोबारा कोई हरकत नहीं की। ट्रेन गोरखपुर की ओर बढ़ रही थी। इसी बीच बस्ती स्टेशन पर ट्रेन रुकी। जब ट्रेन फिर से चली और तिलका ने रामवृक्ष को ढूंढा, तो वह अपनी सीट पर नहीं थे। काफी देर तक खोजबीन की गई, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला। इसके बाद तिलका अकेले गोरखपुर पहुंचा और वहां से होते हुए 2 फरवरी को गांव लौट आया।
फोन कर मांगे गए पैसे
आरती देवी बताती हैं कि दिल्ली में रहते समय तिलका के मोबाइल से एक फोन आया था। फोन करने वाले ने कहा कि दोनों मजदूर शराब और छेड़छाड़ के आरोप में पकड़े गए हैं। अगर इन्हें छुड़ाना है तो तुरंत पैसे भेजो। परिवार घबरा गया। दोनों परिवारों ने मिलकर करीब 4500 रुपये मोबाइल पर भेज दिए। लेकिन पैसे भेजने के बाद फोन बंद हो गया और फिर कोई संपर्क नहीं हुआ।
तिलका की कहानी पर उठ रहे सवाल
गांव के लोगों और परिजनों को तिलका बेदिया की पूरी कहानी पर भरोसा नहीं हो रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उसकी बातें स्पष्ट नहीं हैं और वह ठीक से जवाब नहीं दे रहा है। परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि तिलका से कड़ाई से पूछताछ की जाए और जिस मोबाइल नंबर से पैसे मांगे गए थे उसकी लोकेशन भी निकाली जाए।
एक महीने बाद स्टेशन जाकर भी नहीं मिला सुराग
करीब एक महीने बाद तिलका बेदिया और कुछ ग्रामीण बस्ती स्टेशन पहुंचे और वहां सीसीटीवी फुटेज देखने की कोशिश की। लेकिन स्टेशन प्रशासन ने बताया कि सिर्फ एक महीने का ही रिकॉर्ड रखा जाता है, इसलिए अब फुटेज उपलब्ध नहीं है। इससे परिवार की उम्मीदों को एक और झटका लगा।
हर दिन दरवाजे पर टिक जाती है नजर
आज रामवृक्ष के घर का माहौल बेहद दर्दनाक है। पत्नी आरती देवी की आंखों में हर वक्त आंसू रहते हैं। बच्चे भी अपने पिता के बारे में बार-बार पूछते हैं। आरती देवी कहती हैं, “मुझे पूरा यकीन है कि मेरे पति के साथ कुछ अनहोनी हुई है। बस पुलिस से यही गुहार है कि उन्हें ढूंढ कर हमें सच बता दें।”
प्रशासन से आखिरी उम्मीद
रामवृक्ष की पत्नी ने रामगढ़ एसपी को पत्र देकर पूरे मामले की जांच कराने और अपने पति की खोजबीन करने की मांग की है। परिवार को उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही इस रहस्य से पर्दा उठाएगी और उन्हें उनके अपने का कोई सुराग मिल सकेगा।
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