अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : रांची सेंट्रल जेल की ऊंची दीवारों के भीतर सन्नाटा नहीं था, बल्कि हलचल थी, उम्मीद थी और कई बंदियों के चेहरों पर इंतजार भी साफ दिख रहा था। वजह थी जेल परिसर में लगने वाली जेल अदालत। राष्ट्रीय लोक अदालत के मौके पर झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने रांची सिविल कोर्ट का निरीक्षण किया। इसी क्रम में रांची सेंट्रल जेल में आयोजित जेल अदालत की कार्यवाही का जायजा लिया। इस अदालत में कुछ बंदियों के लिए यह दिन नई शुरुआत लेकर आया। सुनवाई के बाद छह बंदियों को रिहा कर दिया गया।
जब फैसले के साथ लौटी उम्मीद
जेल अदालत में कुल 16 मामलों को न्यायालय के सामने रखा गया। एक-एक कर मामलों की सुनवाई हुई और जब छह बंदियों की रिहाई का फैसला आया तो माहौल बदल गया। जिन लोगों के लिए यह फैसला आया, उनके चेहरों पर राहत साफ दिखाई दे रही थी। जेल के भीतर लंबे समय से बंद लोगों के लिए यह अदालत सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि बाहर की दुनिया में लौटने की उम्मीद लेकर आई थी। कई बंदी ऐसे होते हैं जिनके मामले छोटे होते हैं या कानूनी प्रक्रिया लंबी चलती रहती है। जेल अदालत ऐसे मामलों को तेजी से सुलझाने का रास्ता बनती है।
सिर्फ कागजों तक नहीं, खाने की थाली तक पहुंची नजर
इस दौरान एक दिलचस्प और मानवीय पहल भी देखने को मिली। न्यायिक पदाधिकारियों ने कैदियों के लिए बन रहे शाम के भोजन का निरीक्षण किया। सिर्फ देखने तक सीमित रहने के बजाय अधिकारियों ने खुद खाना चखकर उसकी गुणवत्ता जांची। इसका मकसद साफ था कि जेल में बंद लोगों को मिलने वाला भोजन सही स्तर का हो और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए। अधिकारियों का मानना है कि जेल में रहने वाले लोग भी इंसान हैं और उनके अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।
सेहत का भी रखा गया ध्यान
जेल अदालत के साथ ही कैदियों के लिए मेडिकल जांच शिविर भी लगाया गया। कई बंदियों ने डॉक्टरों से अपनी स्वास्थ्य जांच कराई। डॉक्टरों ने सामान्य जांच की और जरूरत पड़ने पर इलाज की सलाह दी। जेल प्रशासन का कहना है कि ऐसे शिविर बंदियों के लिए काफी उपयोगी होते हैं, क्योंकि कई बार छोटी बीमारियां समय पर जांच से ही पकड़ में आ जाती हैं।
जब कैदियों ने खुलकर रखी अपनी बातें
कार्यक्रम के दौरान विधिक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसबी शर्मा और रांची डालसा के सचिव राकेश रौशन ने बंदियों से सीधे बातचीत की। कई बंदियों ने अपने मामलों से जुड़ी परेशानियां और कानूनी मदद की जरूरत के बारे में बताया। डालसा की ओर से जरूरतमंद बंदियों से लीगल एड के लिए आवेदन भी लिए गए, ताकि उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता मिल सके।
सिविल कोर्ट में भी हुआ निरीक्षण
इससे पहले न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने रांची के व्यवहार न्यायालय का निरीक्षण किया। उन्होंने न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 से बातचीत कर अदालत के कामकाज और मामलों के निष्पादन की जानकारी ली। इस दौरान मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े मामलों में पीड़ित परिवारों के बीच मुआवजा राशि के चेक भी बांटे गए। कई परिवार लंबे समय से इस सहायता का इंतजार कर रहे थे।

कई अधिकारी रहे मौजूद
जेल अदालत के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसबी शर्मा, डालसा सचिव राकेश रौशन, न्यायिक दंडाधिकारी अर्चना कुमारी, सार्थक शर्मा और रितविका सिंह के साथ एलएडीसी सदस्य, जेल अधीक्षक, कारापाल और जेल के अन्य कर्मचारी मौजूद थे। डालसा सचिव राकेश रौशन के अनुसार जेल अदालत और विधिक जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों तक न्याय और कानूनी सहायता को आसानी से पहुंचाना है।
इसे भी पढ़ें : किसकी है ये कोख, किसका है ये दर्द… दो विक्षिप्त बेनाम जिंदगियों का डालसा का सहारा



