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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कभी देश की सीमाओं पर खड़े होकर देश की रक्षा करने वाले अमित कुमार आज खेतों में पसीना बहाकर गांव की तस्वीर बदलने की कोशिश कर रहे हैं। रामगढ़ जिले के भुरकुंडा क्षेत्र में जन्मे अमित कुमार ने सेना से लौटने के बाद शहर की नौकरी या आराम की जिंदगी चुनने के बजाय अपने गांव और मिट्टी से जुड़ने का फैसला किया। आज भदानीनगर इलाके में उनकी जैविक खेती न सिर्फ एक सफल प्रयोग बन चुकी है, बल्कि आसपास के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा भी बन रही है।
सेना से खेत तक का सफर
अमित कुमार ने सेना में रहते हुए देश सेवा की। कई सालों तक कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाने के बाद जब वे गांव लौटे तो उनके सामने कई रास्ते थे। वे चाहें तो किसी शहर में नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने गांव की जमीन को ही अपनी पहचान बनाने का फैसला किया। अमित बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें खेती से लगाव था। सेना से लौटने के बाद उन्होंने ठान लिया कि खेती को ही आधुनिक तरीके से करेंगे और कुछ अलग कर दिखाएंगे।
केमिकल से दूरी, प्रकृति से दोस्ती
अमित कुमार ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुना। उन्होंने जैविक खेती की शुरुआत की। अपने खेतों में वे केमिकल वाले खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते। इसके बजाय प्राकृतिक तरीके से खेती करते हैं। आज उनके खेतों में तरबूज, टमाटर, स्ट्रॉबेरी और कई तरह की हरी सब्जियां उग रही हैं। खेतों में दूर तक फैली हरियाली और ताजी फसलों को देखकर यह समझना मुश्किल नहीं कि मेहनत कितनी ईमानदारी से की गई है। स्थानीय लोग बताते हैं कि अमित के खेतों की सब्जियां स्वाद में अलग होती हैं और ज्यादा ताजी भी रहती हैं। यही वजह है कि लोग अब रसायन मुक्त फल और सब्जियां खरीदने के लिए सीधे उनके खेत तक पहुंचने लगे हैं।
मेहनत ने बदली सोच
शुरुआत में लोगों को यह प्रयोग थोड़ा अलग लगा। कुछ लोगों को शक भी था कि बिना रासायनिक खाद के खेती कैसे सफल होगी। लेकिन समय के साथ अमित की मेहनत रंग लाने लगी। आज हालत यह है कि आसपास के कई किसान उनसे खेती के तरीके सीखने आने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अमित ने यह दिखा दिया कि अगर मेहनत और सही सोच हो तो खेती भी सम्मान और अच्छी आय का जरिया बन सकती है।
गांव के लोगों को भी मिला सहारा
अमित कुमार की खेती से गांव के कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। खेतों में बीज बोने से लेकर फसल तैयार करने तक कई कामों में स्थानीय लोगों को लगाया जाता है। इससे गांव के लोगों को अपने ही इलाके में काम मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले कई लोग काम की तलाश में बाहर जाते थे, लेकिन अब खेती के कारण गांव में भी कुछ अवसर बनने लगे हैं।
खेती के साथ पशुपालन की योजना
अमित कुमार अब अपनी खेती को और आगे बढ़ाने की सोच रहे हैं। उनका मानना है कि अगर खेती के साथ पशुपालन भी जोड़ा जाए तो किसानों की आय और बढ़ सकती है। इसी योजना के तहत वे गाय और बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से पशुपालन के लिए शेड उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह सुविधा मिल जाए तो वे दूध और अन्य उत्पादों का भी उत्पादन शुरू कर देंगे। अमित कुमार की मेहनत और लगन आज इलाके के युवाओं को यह भरोसा दे रही है कि अपने गांव में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है और समाज के लिए कुछ नया किया जा सकता है।
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