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Doha : मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला कर दिया, जो दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात टर्मिनल माना जाता है। यह हमला 18-19 मार्च की रात को हुआ और इसके बाद से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।
टर्मिनल में लगी भीषण आग, बड़ा नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कतर पर कुल पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। कतर की एयर डिफेंस सिस्टम ने चार मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, लेकिन एक मिसाइल सीधे टर्मिनल पर जाकर गिरी।
इस हमले के बाद वहां भीषण आग लग गई और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ। कतर एनर्जी ने भी पुष्टि की है कि टर्मिनल को काफी क्षति पहुंची है। हालांकि राहत की बात ये है कि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
दुनिया की 20% LNG सप्लाई पर असर
रास लफ्फान से दुनिया की करीब 20% LNG सप्लाई होती है। ऐसे में इस हमले का असर सिर्फ कतर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। स्थिति को देखते हुए कतर ने फिलहाल LNG उत्पादन रोक दिया है। इसका सीधा असर बाजार पर दिखा… ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 7% से ज्यादा उछाल आ गया। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो तेल-गैस की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
कतर का कड़ा रुख, ईरान को चेतावनी
कतर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। विदेश मंत्रालय ने कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। साथ ही कतर ने ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है।
UAE और सऊदी अरब भी निशाने पर
मामला यहीं नहीं रुका। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के गैस और तेल ठिकानों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
- UAE के हबशान गैस प्लांट और बाब ऑयल फील्ड को टारगेट किया गया
- मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन उनका मलबा गिरने से प्लांट्स को एहतियातन बंद करना पड़ा
- अबू धाबी में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है
UAE ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बताया है।
बढ़ता तनाव, दुनिया की चिंता
मध्य पूर्व पहले से ही संवेदनशील इलाका रहा है। अब इस ताजा हमले ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। अगर ईरान, कतर, UAE और सऊदी अरब के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पड़ेगा… खासतौर पर ऊर्जा आपूर्ति और तेल-गैस की कीमतों पर।
क्या आगे बढ़ सकता है संकट?
- ऊर्जा सप्लाई चेन बाधित हो सकती है
- तेल और गैस की कीमतें और बढ़ सकती हैं
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक तनाव तेज होगा
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है क्योंकि इसका असर हर देश की अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।
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