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Ranchi : रांची की भागदौड़ भरी जिंदगी में पुलिस की छवि अक्सर सख्त, अनुशासित और ड्यूटी में डूबी हुई दिखती है। लेकिन शुक्रवार की रात न्यू पुलिस लाइन परिसर में कुछ अलग ही नजारा था। यहां खाकी वर्दी के पीछे छुपा एक मानवीय, भावुक और सांस्कृतिक चेहरा खुलकर सामने आया। यह मौका था प्रकृति के महापर्व सरहुल का। एक ऐसा त्योहार जो सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा और समुदाय से जुड़ने का एहसास कराता है।
ड्यूटी और परंपरा
शाम ढलते ही पुलिस लाइन का माहौल बदलने लगा। जहां आम दिनों में सायरन और आदेशों की आवाज गूंजती है, वहीं इस दिन मांदर और नगाड़ों की थाप सुनाई दे रही थी। कार्यक्रम की शुरुआत सखुआ (साल) के वृक्ष की पूजा से हुई। पाहन ने पारंपरिक मंत्रोच्चार के साथ अच्छी बारिश, खुशहाली और शांति की कामना की। इस दौरान कई पुलिसकर्मी, जो रोज कानून-व्यवस्था संभालते हैं, श्रद्धा से सिर झुकाए प्रकृति के सामने खड़े नजर आए, जैसे वे भी इस भागदौड़ से थोड़ी राहत खोज रहे हों।
सरहुल के रंग में रंगी खाकी, मांदर-नगाड़े की थाप पर झूमे रांची एसएसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा, ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह, ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर और कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोए समेत कई अधिकारी #sarhul #RanchiNews #jharkhand pic.twitter.com/S5rnrNcn0B
— News Samvad (@newssamvaad) March 20, 2026
जब पुलिस लाइन बन गई गांव की चौपाल
पूरा परिसर प्राकृतिक चीजों से सजाया गया था… पत्तों, फूलों और पारंपरिक प्रतीकों से। एक पल को लगा जैसे शहर के बीचों-बीच कोई गांव बस गया हो। बच्चे इधर-उधर दौड़ रहे थे, महिलाएं पारंपरिक पोशाक में सजी थीं और जवान अपने परिवार के साथ हंसी-मजाक करते दिखे। यह वही लोग थे जो कभी सड़कों पर ट्रैफिक संभालते हैं, कभी रात भर गश्त करते हैं… लेकिन इस पल वे सिर्फ “परिवार का हिस्सा” थे।

अफसर भी बने परिवार का हिस्सा
इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक सबने एक साथ हिस्सा लिया। एसएसपी राकेश रंजन, सिटी एसपी पारस राणा, ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह, ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर और कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोए समेत कई अधिकारी सिर्फ औपचारिक उपस्थिति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने जवानों और उनके परिवार के साथ वक्त बिताया, बातें की और खुशियां साझा कीं। यहां पद और रैंक की दूरी कम होती नजर आई… सब एक ही रंग में रंगे हुए थे।
मांदर की थाप पर थिरकती खाकी
जैसे ही मांदर और नगाड़े बजे, माहौल पूरी तरह बदल गया। पुलिसकर्मी, जो आमतौर पर अनुशासन में बंधे रहते हैं, इस दिन खुलकर नाचे। अफसर और जवान एक साथ कदम मिलाते नजर आए। उनके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि यह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मन की थकान को दूर करने का एक जरिया है।

रिश्तों को मजबूत करने का मौका
इस मौके पर अधिकारियों ने भी माना कि ऐसे आयोजन सिर्फ त्योहार नहीं होते, बल्कि टीम को जोड़ने का माध्यम होते हैं। जब पुलिसकर्मी अपने परिवार के साथ, अपने साथियों के बीच इस तरह के पल बिताते हैं, तो उनके बीच भरोसा और अपनापन और मजबूत होता है। एसएसपी राकेश रंजन रांची ने इस मौके पर सभी को सरहुल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पुलिस परिवार के बीच आपसी भाईचारे और टीम वर्क को मजबूत करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरहुल हमें प्रकृति से जुड़ने और उसकी रक्षा करने का संदेश देता है, जिसे हर किसी को अपनाना चाहिए।
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