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Ranchi : सरहुल का जुलूस अपने पूरे रंग में था। ढोल-नगाड़ों की आवाज, पारंपरिक नृत्य और हजारों लोगों की भीड़। इसी खुशी और उमंग के बीच एक छोटा सा बच्चा अचानक अपने परिवार से बिछड़ गया। कचहरी चौक के पास वह अकेला खड़ा था, घबराया हुआ, सहमा हुआ। उसे शायद समझ ही नहीं आ रहा था कि अब क्या करे। लेकिन उस भीड़ में कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने उसे अकेला नहीं छोड़ा।
लोगों ने बढ़ाया हाथ, पुलिस बनी सहारा
जब आसपास के लोगों ने बच्चे को अकेले देखा तो वे तुरंत आगे आए। किसी ने उसे पानी दिया, किसी ने समझाने की कोशिश की। फिर उसे ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास पहुंचा दिया गया। यहीं से शुरू हुई एक जिम्मेदारी, जिसे पुलिस ने सिर्फ ड्यूटी नहीं बल्कि इंसानियत के तौर पर निभाया।
रातभर चली तलाश, बच्चे को रखा सुरक्षित
पुलिस ने बच्चे को सीसीआर कंट्रोल रूम में सुरक्षित रखा। उसे संभाला, शांत कराया और यह भरोसा दिया कि वह अकेला नहीं है। इसके साथ ही उसकी पहचान और परिवार तक पहुंचाने के लिए लगातार कोशिशें शुरू हो गईं। वायरलेस पर सूचना दी गई, हर थाना को अलर्ट किया गया, सोशल मीडिया के जरिए भी जानकारी फैलायी गई। लेकिन रात बीत गई, और बच्चे के घरवालों का कोई पता नहीं चल पाया।
परिवार भी रात भर रहा बेचैन
दूसरी तरफ बच्चे का परिवार भी उसी भीड़ में उसे ढूंढता रहा। दादी और मौसी ने हर जगह तलाश की, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि बच्चा कहीं नजर नहीं आया। थक-हारकर वे घर लौट गए, लेकिन रातभर उनकी आंखों में नींद नहीं थी। हर पल यही चिंता कि बच्चा कहां होगा, किस हाल में होगा।

सुबह मिली उम्मीद की खबर
सुबह होते ही बस्ती के कुछ लोगों ने बताया कि बच्चा पुलिस के पास सही सलामत है। यह सुनते ही दादी और मौसी तुरंत सीसीआर कंट्रोल रूम पहुंचीं। वहां पहुंचकर उन्होंने बताया कि बच्चे की मां अब इस दुनिया में नहीं है और पिता भी बीमार हैं। ऐसे में यह बच्चा ही उनके परिवार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी और उम्मीद है।
भावनाओं से भरा पल
जब दादी और मौसी बच्चे के पास पहुंचीं, तो एक अजीब सा पल सामने आया। बच्चा तुरंत उनके साथ जाने को तैयार नहीं हुआ। शायद रातभर का डर और अनजान माहौल उसकी मन:स्थिति पर असर डाल चुका था। पुलिस ने जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने हालात को समझा और बहुत ही संवेदनशील तरीके से स्थिति को संभाला।
पुलिस ने घर तक पहुंचाया
रांची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर कोतवाली और गोंदा थाना की टीम ने बच्चे, उसकी दादी और मौसी को खुद पुलिस गाड़ी से उनके घर तक पहुंचाया। गोंदा थाना क्षेत्र के हथिया गोंदा स्थित घर में जब बच्चा अपने पिता से मिला, तो वह पल बेहद भावुक था। जैसे एक लंबी चिंता खत्म हो गई हो।
लौट आई मुस्कान, दिल से निकली दुआ
बच्चे के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई। परिवार के चेहरे पर सुकून साफ दिख रहा था। भावुक होकर परिजनों ने कहा, “भला हो रांची पुलिस का… अगर ये लोग मदद नहीं करते तो हम अपने बच्चे को कैसे ढूंढ पाते।”
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