अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Hazaribagh (Badkagaon) : गांव के लोगों के लिए इलाज अक्सर आसान नहीं होता। छोटे-छोटे दर्द को लोग नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि अस्पताल दूर है, समय नहीं मिलता और रोजी-रोटी की चिंता भी रहती है। लेकिन जब डॉक्टर खुद गांव के स्कूल तक पहुंच जाएं, तो उम्मीद अपने आप जाग जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा बड़कागांव प्रखंड के बेस स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में देखने को मिला, जहां गोंदुलपारा खनन परियोजना के तहत अदाणी फाउंडेशन की ओर से विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। सुबह से ही स्कूल परिसर में हलचल शुरू हो गई थी। महिलाएं अपने बच्चों के साथ पहुंच रही थीं, बुजुर्ग धीरे-धीरे चलते हुए लाइन में लग रहे थे और युवा भी जांच कराने में पीछे नहीं रहे। किसी को कमजोरी की शिकायत थी, किसी को चक्कर आता था, तो कोई लंबे समय से खांसी से परेशान था। यह शिविर सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को यह भरोसा भी दे गया कि बीमारी छिपाने की चीज नहीं, इलाज कराने की चीज है।
डॉक्टरों के सामने खुलकर रखी लोगों ने परेशानी
शिविर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुषी कमल, डॉ. सुधांशु शेखर और एएनएम संगीता कुमारी मौजूद रहीं। ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं बताईं। महिलाओं ने मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियां साझा कीं, तो बुजुर्गों ने ब्लड प्रेशर और कमजोरी की शिकायत रखी। शिविर में मौजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोगों ने भी व्यवस्था संभालने में सहयोग किया। साहेब राणा, राकेश भोक्ता, विद्यालय के प्रधानाध्यापक छत्री गोप और जीवन कुमार दास की मौजूदगी से शिविर का माहौल और व्यवस्थित रहा।

38 मरीजों की जांच, किसी को मिला इलाज तो किसी को सलाह
स्वास्थ्य शिविर में कुल 38 मरीजों का परीक्षण किया गया। जांच में 33 हीमोग्लोबिन टेस्ट, 6 शुगर टेस्ट और 13 ब्लड प्रेशर जांच
की गई। जांच के दौरान जब रिपोर्ट सामने आई तो कई महिलाओं और युवतियों में खून की कमी पाई गई। 33 हीमोग्लोबिन जांच में 12 मरीजों में कमी सामने आई। डॉक्टरों ने ऐसे मरीजों को तुरंत आयरन की गोलियां दीं और खाने-पीने में सुधार की सलाह दी। डॉक्टरों ने साफ कहा कि अगर कमजोरी को नजरअंदाज किया गया तो यह आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है। उन्होंने हरी सब्जियां, दाल, गुड़, चना, अंडा, दूध और मौसमी फल खाने की सलाह दी।
एक छोटी सी रिपोर्ट, लेकिन बड़ी चिंता
शिविर में मौजूद एक महिला ने बताया कि वह कई दिनों से थकान और चक्कर की समस्या से परेशान थी, लेकिन घर और काम की जिम्मेदारी के कारण डॉक्टर के पास नहीं जा पाई। जब जांच में हीमोग्लोबिन कम निकला तो उसे समझ आया कि कमजोरी सिर्फ थकावट नहीं, शरीर का संकेत भी हो सकती है। ऐसी ही कई महिलाएं थीं, जिनके चेहरे पर चिंता थी, लेकिन डॉक्टरों की सलाह सुनकर राहत भी दिखी। कई लोगों के लिए यह शिविर पहली बार था, जब उन्होंने जांच कराई और बीमारी की असली वजह समझी।
महिलाओं को मिला स्वच्छता का संदेश, 70 सैनिटरी पैड बांटे गए
शिविर में महिलाओं को सिर्फ इलाज नहीं मिला, बल्कि जागरूकता भी मिली। अदाणी फाउंडेशन की ओर से 70 सैनिटरी पैड महिलाओं के बीच वितरित किए गए। डॉक्टरों ने महिलाओं को बताया कि मासिक धर्म के समय साफ-सफाई रखना जरूरी है। गंदगी और लापरवाही से संक्रमण हो सकता है, जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। महिलाओं को यह भी समझाया गया कि समय पर पैड बदलना, हाथ धोना और साफ कपड़े का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
टीबी पर खास चर्चा, लक्षणों की दी गई जानकारी
शिविर में टीबी को लेकर भी जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह बीमारी खांसने, छींकने और थूकने से फैलती है। टीबी के प्रमुख लक्षणों के बारे में ग्रामीणों को बताया गया कि दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना और भूख कम लगना जैसी समस्या दिखे तो तुरंत जांच करानी चाहिए। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि टीबी का इलाज संभव है, लेकिन दवा का पूरा कोर्स समय पर लेना जरूरी है। बीच में दवा छोड़ देने से बीमारी और खतरनाक हो सकती है।
इलाज के साथ भरोसा भी दे गया यह शिविर
ग्रामीणों के लिए यह शिविर किसी राहत की तरह रहा। कई लोग ऐसे थे जो अस्पताल जाने में हिचकते थे या आर्थिक परेशानी के कारण इलाज टाल देते थे। लेकिन स्कूल के उसी परिसर में, जहां बच्चों की पढ़ाई होती है, जब डॉक्टरों ने जांच की तो लोगों को लगा कि स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितनी रोज की जिंदगी। शिविर के दौरान कई ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन बार-बार होने चाहिए, ताकि लोगों को समय पर इलाज और सलाह मिल सके।
शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर लगातार काम
अदाणी फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि बड़कागांव प्रखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य शिविर, स्कूलों का उन्नयन, कौशल विकास प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण इलाकों में बेहतर सुविधा पहुंचाने का प्रयास जारी है।
गांव के लिए यह सिर्फ शिविर नहीं, उम्मीद का दिन था
इस स्वास्थ्य शिविर ने कई चेहरों पर राहत लौटाई। किसी को पहली बार पता चला कि उसकी कमजोरी की वजह खून की कमी है, किसी ने पहली बार ब्लड प्रेशर की जांच कराई और किसी महिला ने मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जरूरी बातें समझीं।
इसे भी पढ़ें : पंचायतों को मिली ₹50 लाख की ताकत, मंत्री दीपिका बोलीं- अब नहीं रुकेगा काम

