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Ranchi : झारखंड में सक्रिय माओवादी संगठन से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि दिवंगत माओवादी नेता प्रशांत बोस ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले एक पत्र लिखकर माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा को संगठन की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चेतावनी दी थी। इस पत्र में प्रशांत बोस ने माओवादी संगठन के अंदर बढ़ते संकट, भारी नुकसान और हथियारबंद संघर्ष की भविष्य की दिशा पर चिंता जताई है। सूत्रों के अनुसार, यह पत्र 20 मार्च 2026 को लिखा गया था और पत्र के अंत में “क्रांतिकारी अभिनंदन” के साथ ‘किसन दा’ नाम से हस्ताक्षर किया गया है। अब यह पत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल हुए इस पत्र में कितना दम है, इसका आधिकारिक तौर पर कोई खुलासा नहीं हो पाया है।
पत्र में क्या लिखा है?
पत्र की शुरुआत “Dear Comrade Sagar” और “आपको लाल सलाम” से की गई है। इसके बाद प्रशांत बोस ने साफ शब्दों में लिखा है कि मौजूदा हालात बेहद गंभीर और जटिल हैं। उन्होंने लिखा कि वर्तमान “डोमेस्टिक सिचुएशन” इतनी कठिन हो चुकी है कि सशस्त्र क्रांति को लगातार आगे बढ़ाना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि CRB और ERB जैसे इलाकों में पार्टी को भारी नुकसान हुआ है और संगठन की स्थिति कमजोर हो रही है। प्रशांत बोस ने मिसिर बेसरा से आग्रह किया है कि अब यह सोचना जरूरी हो गया है कि हथियारबंद संघर्ष को आगे बढ़ाना वास्तव में संभव भी है या नहीं।

‘देरी हुई तो नुकसान और बढ़ेगा’
पत्र में प्रशांत बोस ने कहा है कि संगठन को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने चेताया है कि यदि रणनीति बदलने में अनावश्यक देरी होती है, तो नुकसान की संभावना बहुत अधिक हो जाएगी। उन्होंने यह भी लिखा कि अगर संगठन कोई बड़ा कदम उठाता है, तो विपरीत पक्ष की ओर से निर्णायक कार्रवाई की संभावना कम होगी।
गोपनीयता पर विशेष जोर
पत्र में एक फोन नंबर देने का भी उल्लेख है और कहा गया है कि यदि कोई बात करनी हो तो उस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही प्रशांत बोस ने मिसिर बेसरा से अपील की है कि पत्र की बातों को पूरी तरह गुप्त रखा जाए और जल्द से जल्द प्रतिक्रिया भेजी जाए।
माओवादी संगठन में टूट की आशंका
इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक और सुरक्षा एजेंसियों में हलचल बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि यह पत्र माओवादी संगठन के भीतर आत्ममंथन और असंतोष को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सुरक्षा बलों की कार्रवाई, संगठन के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी या मौत, और जमीनी नेटवर्क के कमजोर होने से माओवादी संगठन दबाव में है।
सुरक्षा एजेंसियों की नजर
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां इस पत्र को माओवादी संगठन के अंदरूनी हालात का महत्वपूर्ण दस्तावेज मान रही हैं। एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के पत्र यह संकेत देते हैं कि माओवादी नेतृत्व के बीच रणनीति को लेकर मतभेद और निराशा बढ़ रही है।
प्रशांत बोस का संगठन में प्रभाव
प्रशांत बोस माओवादी संगठन में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका में रहे। माना जाता है कि उनकी बातों को संगठन के अंदर गंभीरता से सुना जाता था। ऐसे में उनके द्वारा लिखा गया यह पत्र माओवादी आंदोलन के भविष्य को लेकर बड़ा संकेत माना जा रहा है।
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