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Ranchi : ARTTC-BSNL परिसर में सोमवार की सुबह कुछ अलग ही माहौल था। परिसर के भीतर कदम रखते ही महसूस हो रहा था कि आज कोई सामान्य दिन नहीं है। चेहरे पर उत्साह, हाथों में आईडी कार्ड, दोस्तों के साथ सेल्फी और हर तरफ तकनीक व रचनात्मकता की चर्चा। यह नज़ारा था भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) रांची के वार्षिक टेक्नो-कल्चरल फेस्ट सेलेस्टियो 3.0 के तकनीकी कार्यक्रमों के उद्घाटन का। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव की शुरुआत ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि छात्रों के लिए अपने हुनर को साबित करने का मौका है।
जब कॉलेज सिर्फ कॉलेज नहीं रहता, एक सपना बन जाता है
सुबह करीब 11:30 बजे जैसे ही उद्घाटन समारोह शुरू हुआ, सभागार में छात्रों की भीड़ बढ़ने लगी। कई छात्र ऐसे भी थे, जो पहली बार इस तरह के बड़े आयोजन का हिस्सा बन रहे थे। उनके चेहरे पर हल्की घबराहट थी, लेकिन आंखों में आत्मविश्वास की चमक भी। यह वही पल था, जब छात्र समझ रहे थे कि पढ़ाई के अलावा भी एक दुनिया है, जहां उनका आइडिया, उनकी सोच और उनकी मेहनत पहचान बना सकती है।

दीप जला, उम्मीदें जगमगाई
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन डॉ. शशि कांत शर्मा द्वारा किया गया। इसके बाद पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन हुआ। मंच पर जब दीप जला, तो ऐसा लगा जैसे सिर्फ दीपक नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के भीतर छिपे सपनों को भी रोशनी मिल गई हो। इस मौके पर डॉ. शशि कांत शर्मा, डॉ. रोशन सिंह, डॉ. जे.के. मिश्रा, डॉ. संतोष कुमार महतो, डॉ. गौरव सुंदरम और श्री ऋषिकेश पांडेय समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे।

सरस्वती वंदना ने दिल को छू लिया
तकनीकी कार्यक्रमों के बीच जब साज़ क्लब के सदस्यों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, तो माहौल कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गया। हर कोई ध्यान से सुन रहा था। कई छात्र ऐसे थे, जो शायद पहली बार महसूस कर रहे थे कि तकनीक की दुनिया में भी संस्कृति की जड़ें कितनी जरूरी हैं। तालियों की गूंज बता रही थी कि प्रस्तुति ने दिल जीत लिया।
सेलेस्टियो सिर्फ इवेंट नहीं, छात्रों की मेहनत की कहानी है
उद्घाटन के दौरान आयोजन टीम ने सेलेस्टियो 3.0 के कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की। लेकिन मंच से जो बातें कही जा रही थीं, असल में उनके पीछे कई रातों की मेहनत छिपी थी। कुछ छात्र आयोजन टीम का हिस्सा थे, जिनके लिए यह जिम्मेदारी सिर्फ ड्यूटी नहीं थी। उनके लिए यह अपने कॉलेज को पहचान दिलाने का सपना था। एक छात्र ने हौले से मुस्कुरा कर कहा, “हम लोग पिछले कई दिनों से तैयारी कर रहे थे। नींद कम हुई, लेकिन खुशी बहुत है। आज जब सब सही चल रहा है, तो लग रहा है मेहनत सफल हो गई।”

मुख्य आकर्षण बना ऋषिकेश पांडेय का स्पीकर सत्र
उद्घाटन दिवस का सबसे भावनात्मक और प्रेरक हिस्सा रहा श्री ऋषिकेश पांडेय का स्पीकर सत्र। जैसे ही उनका नाम लिया गया, छात्रों में उत्सुकता बढ़ गई। झारखंड के चर्चित शिक्षकों में शामिल ऋषिकेश पांडेय ने मंच पर आते ही ऐसा माहौल बनाया कि हर छात्र खुद को उनकी बातों से जुड़ा महसूस करने लगा।

“अब हर बच्चा पढ़ेगा” सिर्फ लाइन नहीं, एक संघर्ष है
श्री ऋषिकेश पांडेय का मिशन “अब हर बच्चा पढ़ेगा” सिर्फ एक नारा नहीं है। यह उस समाज की कहानी है, जहां बहुत से बच्चों के लिए स्कूल जाना भी सपना होता है। उन्होंने बताया कि कैसे कई बच्चे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी, गरीबी और हालात उन्हें पीछे खींच लेते हैं। उन्होंने छात्रों को समझाया कि शिक्षा सिर्फ डिग्री लेने का जरिया नहीं, बल्कि समाज बदलने की ताकत है। उनकी बातें सुनकर कई छात्र गंभीर हो गए। कुछ के चेहरे पर भाव भी दिखे, क्योंकि वे भी अपने जीवन में संघर्ष का दौर देख चुके थे।

Second School की कहानी ने छात्रों को सोचने पर मजबूर किया
ऋषिकेश पांडेय ने Second School के बारे में बताया, जो झारखंड के वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की एक मजबूत पहल है। उन्होंने कहा कि अगर समाज को बदलना है, तो शिक्षा को हर घर तक पहुंचाना होगा। सत्र के दौरान छात्रों ने सवाल भी पूछे। कोई पूछ रहा था कि शुरुआत कैसे करें, कोई पूछ रहा था कि गांव के बच्चों तक पहुंचने का सही तरीका क्या है।
निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव के संरक्षण में आयोजन
सेलेस्टियो 3.0 का यह आयोजन IIIT रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव के संरक्षण में आयोजित किया गया। संस्थान की तरफ से यह संदेश साफ था कि तकनीकी शिक्षा के साथ छात्रों का सर्वांगीण विकास भी उतना ही जरूरी है।

उद्घाटन के बाद तकनीकी गतिविधियों में दौड़ पड़ा जोश
उद्घाटन समारोह खत्म होते ही माहौल और भी तेज हो गया। अब छात्रों का ध्यान तकनीकी प्रतियोगिताओं और गतिविधियों पर था। कहीं टीमें चर्चा कर रही थीं, कहीं लैपटॉप खुल चुके थे, तो कहीं प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र अपनी रणनीति बनाने में जुट गए। कई प्रतिभागी बाहर से आए थे, जिनके लिए यह आयोजन सिर्फ मुकाबला नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने का मंच था। एक प्रतिभागी छात्र ने कहा, “यहां आकर लग रहा है कि हम सिर्फ पढ़ाई नहीं कर रहे, बल्कि भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।”
सेलेस्टियो 3.0 : जहां प्रतियोगिता नहीं, आत्मविश्वास जीतता है
सेलेस्टियो 3.0 की सबसे बड़ी बात यही है कि यहां सिर्फ जीतने वाले नहीं बनते, बल्कि हर छात्र कुछ सीखकर निकलता है। किसी के लिए यह पहला मंच है, जहां वह अपनी टीम के साथ खड़ा है। किसी के लिए यह पहला मौका है, जब उसका आइडिया लोगों के सामने आया है। और किसी के लिए यह पहला दिन है, जब उसने खुद पर भरोसा करना शुरू किया है।

सेलेस्टियो 3.0 क्या है?
सेलेस्टियो 3.0 IIIT रांची का वार्षिक टेक्नो-कल्चरल उत्सव है, जहां तकनीकी प्रतियोगिताएं, हैकाथॉन, कार्यशालाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरक स्पीकर सत्र आयोजित किए जाते हैं। यह फेस्ट छात्रों को सीखने, प्रतिस्पर्धा करने और अपने हुनर को एक बड़े मंच पर दिखाने का मौका देता है।
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