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Ranchi : IIT यानी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान रांची का नाम आते ही दिमाग में सबसे पहले लैब, कोडिंग, टेक्नोलॉजी और भविष्य के इंजीनियर्स की तस्वीर उभरती है। यहां की दिनचर्या आमतौर पर असाइनमेंट, प्रोजेक्ट, प्रेजेंटेशन और क्लास के बीच दौड़ती रहती है। लेकिन जब सेलेस्टियो 3.0 की सांस्कृतिक संध्याएं शुरू हुईं, तो वही कैंपस कुछ देर के लिए बिल्कुल अलग दुनिया बन गया। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था। यह उन छात्रों की सांस लेने की जगह थी, जो रोज़ किताबों के बोझ और करियर की चिंता के बीच खुद को कहीं पीछे छोड़ देते हैं। सेलेस्टियो 3.0 ने उन्हें मंच दिया, रोशनी दी और मौका दिया कि वे दुनिया को दिखा सकें कि तकनीकी दिमाग के भीतर कला का दिल भी धड़कता है।

दीप की लौ जली, तो उम्मीदों की रोशनी भी जगमगा उठी
ARTTC-BSNL परिसर में आयोजित इस आयोजन की शुरुआत बेहद पारंपरिक और गरिमामयी तरीके से हुई। निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने एफआईसी एवं एसोसिएट डीन के साथ फीता काटकर और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दीपक की लौ जैसे ही जली, वहां मौजूद छात्र-छात्राओं के चेहरों पर एक अलग चमक दिखाई देने लगी। यह वही चमक थी, जो किसी त्योहार की शुरुआत में घर के आंगन में दिखती है। मंच पर रोशनी थी, सामने उत्साहित भीड़ और हवा में उत्सव का एहसास। इस मौके पर डॉ. शशि कांत शर्मा, डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्रा, डॉ. संतोष कुमार महतो, डॉ. गौरव सुंदरम सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

गणेश वंदना से माहौल हुआ शांत, फिर तालियों ने पकड़ ली रफ्तार
कार्यक्रम की शुरुआत साज़ क्लब द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना से हुई। संगीत की पहली धुन के साथ ही भीड़ का शोर थम गया। हर कोई मंच की तरफ देखने लगा। कुछ पल के लिए ऐसा लगा मानो पूरा परिसर एक ही लय में सांस ले रहा हो। इसके बाद नृत्यराशी क्लब ने पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति दी। रंग-बिरंगे परिधान, ताल में कदम और चेहरे पर आत्मविश्वास… प्रस्तुति खत्म होते ही तालियों की आवाज से पूरा मैदान गूंज उठा। यह सिर्फ नृत्य नहीं था, यह उस मेहनत की कहानी थी जो रिहर्सल के लंबे घंटों के बाद मंच पर उतरती है।

जब शिक्षकों को मिला सम्मान, और छात्रों ने दिल से तालियां बजाईं
सेलेस्टियो 3.0 के दौरान एक बेहद भावुक और मानवीय पल तब आया जब छात्र परिषद ने अपने शिक्षकों को सम्मानित किया। डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्रा, डॉ. अंकिता, डॉ. गौरव सुंदरम और डॉ. राजेश द्विवेदी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। यह दृश्य किसी औपचारिक कार्यक्रम जैसा नहीं था। यह एक परिवार जैसा था, जहां छात्र अपने मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान दिखा रहे थे। कई छात्र मुस्कुरा रहे थे, कुछ के चेहरों पर गर्व था और मंच पर खड़े शिक्षकों की आंखों में अपनापन साफ नजर आ रहा था।

मंच पर उतरे युवा कलाकार, और हर प्रस्तुति में दिखी अपनी कहानी
इसके बाद मंच पूरी तरह छात्रों के नाम हो गया। किसी ने सोलो परफॉर्मेंस से दिल छू लिया, किसी ने डांस से ऊर्जा भर दी, तो किसी ने नाट्य प्रस्तुति से दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। फ्लैश मॉब के दौरान अचानक भीड़ में हलचल हुई और फिर एक साथ कई छात्र ताल में थिरकने लगे। उस पल हर कोई मोबाइल कैमरा निकालकर रिकॉर्ड करने लगा। लेकिन असल बात रिकॉर्डिंग नहीं थी, असल बात वह खुशी थी जो आंखों में उतर रही थी। यह वही छात्र थे जो क्लास में अक्सर शांत रहते हैं, लेकिन मंच पर आते ही उनकी आवाज और उनके कदम बोलने लगते हैं।

सुनिधि चौधरी की एंट्री और फिर पूरा कैंपस एक सुर में झूम उठा
शाम का सबसे बड़ा आकर्षण रही प्रसिद्ध गायिका सुनिधि चौधरी की प्रस्तुति। जैसे ही उनका नाम मंच से लिया गया, छात्रों की भीड़ में जोश की लहर दौड़ गई। तालियां, सीटियों और खुशी की आवाज ने माहौल को गर्म कर दिया। सुनिधि ने मंच पर आते ही ऐसा समां बांधा कि लोग खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने ‘तुम मिले’, ‘केसरिया’, ‘क्रेज़ी किया रे’, ‘तू जो मिला’ जैसे लोकप्रिय गाने गाए। कुछ छात्र गानों के बोल के साथ झूम रहे थे, कुछ दोस्त एक-दूसरे का हाथ पकड़कर गा रहे थे, और कई छात्र मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर हवा में लहरा रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा IIIT रांची एक बड़े संगीत समारोह में बदल गया हो। यह सिर्फ कॉन्सर्ट नहीं था, यह उन युवाओं के लिए एक ऐसा पल था जिसे वे सालों बाद भी याद करेंगे। प्रस्तुति के बाद निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव एवं एफआईसी द्वारा सुनिधि चौधरी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
रिपल्स बैंड ने बढ़ाई धड़कनें, और संगीत ने जोड़ दिया हर दिल
सुनिधि चौधरी के बाद मंच संभाला रिपल्स बैंड ने। बैंड की प्रस्तुति में अलग ही ऊर्जा थी। गिटार की धुन और ड्रम की थाप ने माहौल को और ज्यादा जोशीला बना दिया। छात्र-छात्राएं तालियां बजाते रहे, कुछ झूमते रहे, और कुछ बस उसी पल को जीते रहे।

दूसरा दिन भी उतना ही रंगीन, उतना ही जिंदा
सेलेस्टियो 3.0 का दूसरा दिन भी उसी जोश और उमंग के साथ आगे बढ़ा। शुरुआत परिचय सत्र से हुई और फिर मंच पर एक के बाद एक रंग जमते चले गए। अल्फ़ाज़ काव्य प्रस्तुति में शब्दों का जादू दिखा। कविता में प्रेम भी था, संघर्ष भी, और सपनों की उड़ान भी। कई छात्र चुपचाप सुनते रहे, क्योंकि कुछ शब्द सीधे दिल में उतर रहे थे। इसके बाद साज़ बैंड ने संगीत की प्रस्तुति दी, और फिर नृत्यराशी क्लब की एकल नृत्य प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मंच पर कोई डर नहीं था, बस आत्मविश्वास था।
नाटक, फ्लैश मॉब और रैंप वॉक ने बांधा दर्शकों का ध्यान
अभिनय क्लब की नाट्य प्रस्तुति ने लोगों को हंसाया भी और सोचने पर मजबूर भी किया। फ्लैश मॉब ने पूरे माहौल को अचानक चौंका दिया, और एस्टिलो रैंप वॉक में छात्रों का आत्मविश्वास देखते ही बनता था। यह मंच उन युवाओं का था, जो अपने हुनर को अब तक सिर्फ दोस्तों के बीच दिखाते थे, लेकिन आज वे सबके सामने चमक रहे थे।
पुरस्कार मिले तो मेहनत को मिला असली सम्मान
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को पुरस्कार और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। मंच पर आते ही कई छात्रों की आंखों में खुशी साफ झलक रही थी। किसी के लिए यह पहला पुरस्कार था, किसी के लिए पहला मंच, और किसी के लिए जिंदगी की पहली बड़ी तालियां। ऐसे पल इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देते हैं।
मिररज बैंड और डीजे नाइट ने बना दी रात यादगार
संध्या का मुख्य आकर्षण बना मिररज़ बैंड की लाइव प्रस्तुति। उनकी परफॉर्मेंस ने पूरे कैंपस को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद यंग एंड ब्रोक (डीजे) ने बीट्स की रफ्तार बढ़ा दी। चारों तरफ सिर्फ एक ही चीज थी, खुशी। कैंपस में मौजूद हर छात्र उस रात अपनी पढ़ाई, टेंशन और डेडलाइन भूलकर बस जश्न में डूबा हुआ था।
सेलेस्टियो 3.0 ने बताया, IIIT रांची सिर्फ तकनीक नहीं, एक परिवार भी है
सेलेस्टियो 3.0 की सांस्कृतिक संध्याएं इस बात का प्रमाण हैं कि IIIT रांची केवल तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं है। यह संस्थान छात्रों के समग्र विकास, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को भी उतना ही महत्व देता है। यह आयोजन उन पलों में बदल गया जो छात्रों की कॉलेज लाइफ की सबसे खूबसूरत याद बनकर रह जाएंगे।
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