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Home » 29 बच्चों की मेहनत को मिला सम्मान, मंच पर दिखे सपनों के असली चेहरे
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29 बच्चों की मेहनत को मिला सम्मान, मंच पर दिखे सपनों के असली चेहरे

April 16, 2026No Comments3 Mins Read
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परख
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अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ समाहरणालय के सभागार में गुरुवार के दिन उन कहानियों का जश्न मनाया गया जो अक्सर किताबों के पन्नों में नहीं दिखतीं। प्रोजेक्ट परख 2.0 के तहत सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 29 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया, लेकिन असल में सम्मान उनकी मेहनत, संघर्ष और जिद का था। जब ये बच्चे मंच पर पहुंचे, तो उनके हाथ में प्रमाण पत्र था, लेकिन आंखों में उन दिनों की झलक थी जब उन्होंने चुपचाप मेहनत की, कई बार हार मानी, फिर खुद को संभाला और आगे बढ़े।

घर की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई

इन बच्चों में कुछ ऐसे भी थे जो पढ़ाई के साथ घर की जिम्मेदारियां निभा रहे थे। किसी के पिता मजदूरी करते हैं, तो किसी की मां घरों में काम करती हैं। कई बच्चों ने बताया कि उन्होंने बिजली कटौती के बीच लालटेन या मोबाइल की रोशनी में पढ़ाई की। एक छात्रा ने कहा, “कभी-कभी लगता था कि शायद हम नहीं कर पाएंगे, लेकिन मां-पापा का भरोसा हमें आगे बढ़ाता रहा।” यही भरोसा आज उन्हें मंच तक लेकर आया।

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“परीक्षा सिर्फ नंबर नहीं, एक रास्ता है”

एसपी निधि द्विवेदी ने बच्चों से बात करते हुए उन्हें यही समझाने की कोशिश की कि परीक्षा सिर्फ नंबर लाने का जरिया नहीं है। यह एक ऐसा रास्ता है जो जिंदगी में नए मौके खोलता है। उन्होंने कहा कि हर बच्चा अलग है, हर किसी की कहानी अलग है, लेकिन जो चीज सबको जोड़ती है, वह है मेहनत और ईमानदारी। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि खुद पर भरोसा रखें, लगातार सीखते रहें और सफलता मिलने पर भी जमीन से जुड़े रहें।

“संघर्ष जितना बड़ा, सफलता उतनी खास”

डीसी मनीष कुमार ने जब मंच से बच्चों को देखा, तो उन्होंने सिर्फ टॉपर नहीं, बल्कि संघर्ष की मिसाल देखी। उन्होंने कहा कि असली सफलता वह होती है जो मुश्किल हालात में हासिल की जाए। अगर किसी बच्चे ने अपने पुराने प्रदर्शन से थोड़ा भी सुधार किया है, तो वह भी उतना ही सम्मान के लायक है। उन्होंने बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए तैयार रहने को कहा। साथ ही यह भी याद दिलाया कि मोबाइल से दूरी बनाना जरूरी है, करियर का चुनाव सोच-समझकर करें और हर कदम पर सीखते रहें।

माता-पिता और गुरुओं की भूमिका

इस समारोह में सिर्फ बच्चे ही नहीं, उनके माता-पिता और शिक्षक भी भावुक दिखे। कई अभिभावकों की आंखों में खुशी के आंसू थे। एक पिता ने कहा, “हम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन हमने हमेशा अपने बच्चे को पढ़ने के लिए कहा। आज उसका सम्मान देख कर लगता है कि हमारी मेहनत सफल हो गई।” शिक्षकों ने भी माना कि इन बच्चों ने सिर्फ पढ़ाई नहीं की, बल्कि खुद को हर दिन बेहतर बनाने की कोशिश की।

 एक दिन, जो हमेशा याद रहेगा

यह सम्मान समारोह बच्चों के लिए एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। लेकिन यह पड़ाव उन्हें यह एहसास जरूर दिलाता है कि उनकी मेहनत देखी जा रही है, सराही जा रही है। जब कार्यक्रम खत्म हुआ, तो बच्चे अपने सर्टिफिकेट के साथ फोटो खिंचवा रहे थे। कुछ हंस रहे थे, कुछ चुपचाप बैठे थे, शायद अपने सफर को याद कर रहे थे।

इसे भी पढ़ें : सड़क पर बिखर गयी सांसें, रास्ते में ही खत्म हो गया सफर

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