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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : दिन ढल रहा था। सड़क पर रोज की तरह आवाजाही थी। तीन दोस्त एक ही स्कूटी पर घर लौट रहे थे। मन में बस एक ही बात रही होगी, जल्दी घर पहुंच जाएं। लेकिन अरगड्डा-बिन्झार रोड पर उस दिन किस्मत कुछ और ही लिख चुकी थी। तेज रफ्तार ने ऐसा वार किया कि दो घरों की दुनिया एक झटके में उजड़ गई।
एक साथ निकले थे तीन दोस्त
अमित मुंडा, बबलू बेदिया और पंकज बेदिया। तीनों साथ निकले थे, हंसी-मजाक करते हुए, रोज की तरह। रामगढ़ से अपने गांव मनुवा लौटते वक्त उन्हें क्या पता था कि यह सफर आखिरी साबित होगा। सामने से आ रही तेज रफ्तार गाड़ी ने स्कूटी को इतनी जोर से टक्कर मारी कि सब कुछ पलभर में खत्म हो गया। अमित और बबलू वहीं सड़क पर गिर पड़े। लोगों के पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं।
सड़क पर बिखरी पड़ी थी कहानी
हादसे के बाद सड़क पर बिखरी चप्पलें, टूटी स्कूटी और खून के निशान उस पल की भयावहता बयां कर रहे थे। आसपास खड़े लोग सन्न थे। किसी के पास शब्द नहीं थे, सिर्फ खामोशी थी और आंखों में डर। किसी ने धीरे से कहा, “अभी तो हंसते हुए निकले थे…”
एक जिंदगी अब भी जंग लड़ रही है
तीसरा दोस्त पंकज बेदिया जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर उसे बचाने की कोशिश में जुटे हैं। गांव के लोग हर पल उसकी खबर ले रहे हैं, जैसे हर सांस के साथ उम्मीद जुड़ी हो।
घरों में गूंजती रही चीखें
जब यह खबर गांव पहुंची, तो मनुवा में जैसे समय थम गया। जिन घरों में शाम की चहल-पहल होनी थी, वहां चीखें गूंजने लगीं। मां-बाप, भाई-बहन… हर कोई यही पूछ रहा था, “ऐसा कैसे हो गया?” अमित और बबलू के घरों में अब सन्नाटा है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
गुस्से में बदला दर्द, सड़क पर उतर आए लोग
दर्द जब हद से गुजरता है, तो गुस्से में बदल जाता है। यही हुआ इस हादसे के बाद। ग्रामीण सड़क पर उतर आए। दोनों युवकों के शव को बीच सड़क पर रखकर उन्होंने मुआवजे की मांग शुरू कर दी। देखते ही देखते सड़क जाम हो गई। गाड़ियों की लंबी कतार लग गई, लेकिन उस भीड़ के बीच सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर कब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।
हर हादसे के बाद वही सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर तेज रफ्तार अब आम बात हो गई है। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। लोग पूछ रहे हैं कि क्या हर बार किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा?
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