अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh : सुबह के वक्त मोहल्लों में कचरा गाड़ी की आवाज सुनाई देती है। लोग घरों से निकलकर कचरा देते हैं और अपनी दिनचर्या में लग जाते हैं। सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन इसी रोजमर्रा की तस्वीर में एक ऐसी खामी छिपी है, जो अब लोगों की नजर में खटकने लगी है। नगर निगम की कई कचरा गाड़ियां बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रही हैं।
जब कानून सिर्फ आम आदमी के लिए रह जाए
रामगढ़ की सड़कों पर यह विरोधाभास साफ दिखता है। एक तरफ ट्रैफिक पुलिस बिना नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों पर तुरंत चालान करती है। दूसरी तरफ नगर निगम की गाड़ियां बिना किसी पहचान के खुलेआम घूम रही हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है? क्या सरकारी गाड़ियों को नियमों से छूट मिली हुई है?
“सरकारी गाड़ी है, नंबर नहीं होता”
स्थानीय लोगों ने जब ड्राइवरों से वजह पूछी, तो जो जवाब मिला उसने हैरानी बढ़ा दी। कहा गया कि यह नगर निगम की गाड़ी है, इसमें नंबर प्लेट नहीं होता। यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही। क्योंकि नियम साफ है कि हर वाहन का पंजीकरण जरूरी है, चाहे वह निजी हो या सरकारी।
जवाबदेही का सवाल, जो टाल नहीं सकते
नंबर प्लेट सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होती, यह पहचान और जिम्मेदारी का आधार है। अगर इन गाड़ियों से कोई हादसा हो जाए, किसी को चोट लगे या किसी की संपत्ति को नुकसान पहुंचे, तो जिम्मेदारी तय कैसे होगी? बिना नंबर के वाहन का पता लगाना आसान नहीं होता।
प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल
ये गाड़ियां रोज मुख्य सड़कों, बाजारों और गलियों से गुजरती हैं। मतलब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। फिर भी अब तक प्रशासन या परिवहन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही चुप्पी लोगों को ज्यादा परेशान कर रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर यही काम कोई आम नागरिक करता, तो अब तक कई चालान कट चुके होते।
जनता के मन में बढ़ता असंतोष
मोहल्लों में अब इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होने लगी है। लोग इसे सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही मान रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन अगर खुद नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो व्यवस्था पर भरोसा कैसे बनेगा।
सुधार की उम्मीद या फिर अनदेखी जारी
अब सवाल सीधा है। क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा। रामगढ़ के लोग जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सफाई के साथ-साथ व्यवस्था भी साफ होगी।
इसे भी पढ़ें : बॉर्डर पर एनका’उंटर, 15 लाख का इनामी और महिला नक्सली समेत 4 का खात्मा



