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Pakur (Jaydev Kumar) : रिजल्ट का दिन सिर्फ अंकों का दिन नहीं होता, यह सपनों, मेहनत और इंतजार के पूरे सफर का परिणाम होता है। जब 10वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे आए, तो एचएस क्लासेस में भी खुशियों की लहर दौड़ गई। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान थी, अभिभावकों की आंखों में संतोष और शिक्षकों के मन में गर्व। कारण भी खास था, संस्थान ने एक बार फिर 100 प्रतिशत रिजल्ट देकर अपनी पहचान मजबूत कर दी। इस बार भी एचएस क्लासेस के छात्रों ने न सिर्फ अच्छे अंक हासिल किए, बल्कि जिला स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। सीबीएसई बोर्ड से ईशान अली ने 93.70 प्रतिशत अंक लाकर जिले में 7वीं रैंक हासिल की, जबकि जेएसी बोर्ड से हेमा कुमारी ने 94.80 प्रतिशत अंकों के साथ 4थी रैंक प्राप्त कर संस्थान का नाम ऊंचा कर दिया।
सिर्फ नंबर नहीं, मेहनत की कहानी
इन अंकों के पीछे सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि रोज की मेहनत, समय पर क्लास, लगातार टेस्ट, शिक्षकों की निगरानी और बच्चों का समर्पण छिपा है। एच.एस. क्लासेस की यही खासियत है कि यहां पढ़ाई सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हर छात्र की क्षमता को पहचानकर उसे आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है। ईशान अली की सफलता भी इसी निरंतर अभ्यास का नतीजा है। विज्ञान में 96 अंक, सामाजिक विज्ञान में 96 अंक और अंग्रेजी में 91 अंक हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि नियमित तैयारी का कोई विकल्प नहीं होता। वहीं गणित में रागिनी कुमारी ने 97 अंक लाकर सबसे अधिक अंक प्राप्त किए।
हर विषय में दिखा दम
इस बार संस्थान का औसत स्कोर 78.5 प्रतिशत रहा, जो बताता है कि सफलता सिर्फ कुछ छात्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग हर छात्र ने बेहतर प्रदर्शन किया। गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में शानदार अंक यह साबित करते हैं कि बच्चों की बुनियाद मजबूत की गई थी। यही वजह है कि परिणाम आने के बाद सिर्फ टॉपर्स ही नहीं, हर विद्यार्थी के घर में खुशी का माहौल देखने को मिला।
100 प्रतिशत रिजल्ट बना पहचान
एच.एस. क्लासेस के संचालक करण मध्यान बताते हैं कि यह पहली बार नहीं है। हर साल संस्थान का प्रयास यही रहता है कि कोई भी बच्चा पीछे न रह जाए। इस बार भी 100 प्रतिशत बच्चों ने अच्छे अंकों के साथ परीक्षा पास की। करण मध्यान कहते हैं, “हम सिर्फ पढ़ाई नहीं कराते, हम बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करते हैं। जब बच्चा खुद पर भरोसा करना सीख जाता है, तब सफलता अपने आप रास्ता बना लेती है। हमारी मेहनत और बच्चों का समर्पण ही हमारी पहचान है।” उनका मानना है कि कोचिंग का असली काम सिर्फ रिजल्ट देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की अगली चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
अभिभावकों का बढ़ा भरोसा
रिजल्ट के बाद संस्थान में लगातार अभिभावकों का आना-जाना लगा रहा। कई अभिभावकों ने शिक्षकों को धन्यवाद दिया और कहा कि बच्चों की सफलता में संस्थान की बड़ी भूमिका रही। एक अभिभावक ने कहा कि यहां पढ़ाई के साथ अनुशासन पर भी बहुत ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि बच्चे सिर्फ परीक्षा नहीं, जीवन के लिए भी तैयार होते हैं।
सफलता बनी प्रेरणा
एचएस क्लासेस की यह उपलब्धि सिर्फ एक कोचिंग संस्थान की सफलता नहीं, बल्कि उन तमाम छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। ईशान अली और हेमा कुमारी जैसे छात्र यह संदेश दे रहे हैं कि अगर मेहनत सच्ची हो, मार्गदर्शन सही हो और इरादा मजबूत हो, तो सफलता जरूर मिलती है। इस बार का रिजल्ट फिर यही कह रहा है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और सही दिशा में उठाया गया हर कदम मंजिल तक पहुंचाता है।
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