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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सीसीएल बरका सयाल क्षेत्र की भुरकुंडा कोलियरी अंतर्गत संगम खुली खदान शुरू होते ही विवाद गहरा गया है। खदान चालू होने के महज 24 घंटे के भीतर रैयत विस्थापित ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण शुक्रवार सुबह आंदोलन पर उतर आए और खदान में चल रहे काम को बंद करा दिया। इस दौरान उत्खनन स्थल पर गाड़ियों का आवागमन भी पूरी तरह प्रभावित रहा।
पारंपरिक हथियारों के साथ पहुंचे ग्रामीण
सुबह करीब 10 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण संगम खुली खदान के उत्खनन स्थल पर पहुंचे। प्रदर्शन में शामिल कई ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ नजर आए। आंदोलनकारियों ने खदान परिसर में पहुंचकर काम रुकवा दिया और साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक खदान में कोई काम नहीं होने दिया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कहा, “जिसकी जमीन, उसको काम नहीं तो खदान का काम बंद रहेगा।”

जमीन गई, लेकिन हक अब तक नहीं मिला
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वजों की जमीन सीसीएल ने विकास और परियोजना के नाम पर अधिग्रहित की थी। उस समय उन्हें भरोसा दिया गया था कि जमीन के बदले उचित मुआवजा, नौकरी और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी विस्थापित परिवारों को उनका हक नहीं मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार प्रबंधन सिर्फ आश्वासन देता है, लेकिन जमीन देने वाले परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता। इसी नाराजगी के कारण अब लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है।
महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा
इस आंदोलन की खास बात यह रही कि सिर्फ पुरुष ही नहीं, बड़ी संख्या में महिलाएं भी विरोध प्रदर्शन में शामिल रहीं। महिलाओं ने भी अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि अब सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा। परिवारों ने अपनी जमीन दी है, इसलिए रोजगार और मुआवजा उनका अधिकार है। आंदोलनकारियों ने कहा कि अब यह लड़ाई आर-पार की है और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रबंधन को दी सीधी चेतावनी
रैयत विस्थापित मोर्चा से जुड़े लोगों ने सीसीएल प्रबंधन को साफ चेतावनी दी कि अब कोरे आश्वासन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उनका कहना है कि अगर जमीन अधिग्रहण के समय किए गए वादे पूरे नहीं किए गए, तो खदान का संचालन लगातार प्रभावित किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि अपने हक और अधिकार के लिए वे अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।
आंदोलन में ये लोग रहे शामिल
प्रदर्शन में शंकर मांझी, संतोष मांझी, बिहारी मांझी, वीरेंद्र मांझी, रंजीत बेसरा, सन्नी बेसरा, अमित साव, बबलू सोरेन, वरुण मुर्मू, देव मुर्मू, शिवलाल मुर्मू, मिलन यादव, प्रिंस बेदिया, फरका मांझी, अनिल हेम्ब्रम, राजेश मुर्मू, सिकंदर मुर्मू, रानी देवी, सरस्वती देवी, मानसी देवी, ममता देवी, मनीता देवी, सारो देवी समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।
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