अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : पूर्वी भारत में आर्थिक अपराधों की जांच को लेकर ईडी ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब झारखंड और पश्चिम बंगाल से जुड़े कई अहम मामलों की निगरानी एक ही अधिकारी के हाथ में होगी। रांची जोन के संयुक्त निदेशक प्रभाकर प्रभात को कोलकाता जोन का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस फैसले को ईडी की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि दोनों राज्यों से जुड़े कई मामलों में पैसों के लेनदेन की कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ती रही हैं।
अब जांच में कम होगी देरी
अब तक झारखंड और पश्चिम बंगाल में ईडी की जांच अलग-अलग जोन के जरिए चलती थी। ऐसे में अगर किसी मामले की कड़ी दोनों राज्यों से जुड़ती थी, तो सूचनाएं साझा करने और कार्रवाई में समय लगता था। अब एक ही अधिकारी के पास दोनों जोन की जिम्मेदारी होने से फैसले जल्दी हो सकेंगे और जांच की रफ्तार बढ़ सकती है। जानकारों का मानना है कि झारखंड में कोयला, जमीन और अवैध खनन से जुड़े जिन मामलों की जांच चल रही है, उनमें कई बार पैसों के लेनदेन का लिंक कोलकाता तक पहुंचता है। ऐसे में एक ही स्तर से निगरानी होने पर तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है।
मार्च में आए, मई में मिली बड़ी जिम्मेदारी
प्रभाकर प्रभात को मार्च 2026 में रायपुर से रांची भेजा गया था। रांची आने के कुछ ही समय बाद उन्हें कोलकाता जोन का अतिरिक्त प्रभार मिल जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईडी पूर्वी भारत में अपनी जांच व्यवस्था को ज्यादा मजबूत करना चाहती है। इस फैसले के बाद यह भी माना जा रहा है कि जिन मामलों में झारखंड और बंगाल के बीच कथित आर्थिक नेटवर्क सक्रिय हैं, उन पर फोकस और बढ़ेगा।
शेल कंपनियों के जरिए पैसों के खेल पर नजर
जांच एजेंसियों के सामने पहले भी ऐसे मामले आए हैं, जिनमें आरोप लगे कि झारखंड में हुए कथित घोटालों का पैसा दूसरे राज्यों तक पहुंचाया गया। खासकर कोलकाता की कुछ शेल कंपनियों के जरिए रकम घुमाने की बात कई जांचों में सामने आती रही है। अब ईडी की कोशिश ऐसे नेटवर्क को जोड़कर देखने की है, ताकि यह समझा जा सके कि पैसा कहां से निकला, किन रास्तों से गया और आखिर किस तक पहुंचा।
इसे भी पढ़ें : उत्पाद सिपाही पेपर लीक केस में आरोपियों को जमानत… जानें

