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Koderma (Aftab Alam) : कोडरमा की मिटको कॉलोनी में गुरुवार की दोपहर एक मासूम बच्चे की दुनिया हमेशा के लिए बदल गई। रोज की तरह स्कूल की घंटी बजी, वैन ने कॉलोनी के बाहर बच्चे को उतारा, और वह अपने छोटे-छोटे कदमों से घर की तरफ बढ़ गया। उसके लिए यह एक आम दिन था। शायद उसने सोचा होगा कि मां दरवाजा खोलेगी, पानी देगी, स्कूल की बातें पूछेगी, टिफिन देखा जाएगा, होमवर्क की बात होगी। लेकिन घर के अंदर उसका इंतजार कुछ और ही कर रहा था। जैसे ही बच्चे ने कमरे में कदम रखा, उसकी आंखों के सामने ऐसा मंजर था जिसे कोई बड़ा भी आसानी से बर्दाश्त नहीं कर सकता। सामने उसकी मां नेहा राज खून से लथपथ पड़ी थीं। गले पर गहरे जख्म थे। शरीर से बहता खून कमरे की खामोशी को और भयावह बना रहा था। अगले ही पल मासूम की चीख पूरे मोहल्ले में गूंज उठी। यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी। यह एक बच्चे के बचपन पर लगा ऐसा जख्म है, जो शायद जिंदगी भर उसके साथ रहेगा।
वह चीख जिसने पूरे मोहल्ले को दौड़ा दिया
दोपहर करीब 12:30 बजे मिटको कॉलोनी की रफ्तार सामान्य थी। लोग अपने-अपने काम में लगे थे। तभी अचानक एक बच्चे की चीख ने सन्नाटा तोड़ दिया। पहले किसी को अंदाजा नहीं था कि हुआ क्या है। लोगों ने सोचा, बच्चा गिर गया होगा या किसी बात से डर गया होगा। लेकिन जब वह रोता-बिलखता घर से बाहर भागा और कांपती आवाज में बोला, “मां के गले से खून निकल रहा है… मां बोल नहीं रही हैं…”। यह सुनते ही मोहल्ले के लोग बिना एक पल गंवाए घर की तरफ दौड़ पड़े।
अंदर का मंजर देखकर कांप उठे लोग
घर के भीतर जो दृश्य था, उसने हर किसी को झकझोर दिया। करीब 30 साल की नेहा राज फर्श पर खून से लथपथ पड़ी थीं। गले पर धारदार हथियार से वार के निशान साफ दिख रहे थे। कमरे में संघर्ष के संकेतों की भी चर्चा होने लगी। हर तरफ अफरा-तफरी थी। कुछ लोग महिला को संभालने की कोशिश कर रहे थे, कुछ पति को फोन मिला रहे थे, तो कुछ बच्चे को चुप कराने की कोशिश में लगे थे। लेकिन उस मासूम की आंखों में जो डर था, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। हर बच्चे के लिए स्कूल से लौटने के बाद मां सबसे पहला चेहरा होती है। वही खाना देती है, माथा सहलाती है, दिनभर की बातें सुनती है। लेकिन इस बच्चे के हिस्से में वह पल आया, जहां उसे मां की गोद नहीं, खून से सना फर्श मिला।
9 साल पुराना रिश्ता, एक पल में उजड़ गया घर
बताया जा रहा है कि नेहा राज और शंभू राणा ने करीब 9 साल पहले लव मैरिज की थी। परिवार अपनी दुनिया में व्यस्त था। किसी ने शायद नहीं सोचा होगा कि दिनदहाड़े उनके घर में ऐसा खूनी खेल होगा। पति को जैसे ही सूचना मिली, वह घबराकर घर की ओर भागे। परिचितों को फोन किया गया। उमेश पंडित समेत कई लोग पहुंचे। आनन-फानन में नेहा राज को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक तरफ पत्नी की मौत का सदमा, दूसरी तरफ बच्चे का टूटा मन। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
आखिर घर के अंदर पहुंचा कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है। दिनदहाड़े घर में यह वारदात कैसे हुई? क्या हमलावर कोई परिचित था? क्या महिला ने खुद दरवाजा खोला? क्या घर में पहले से कोई मौजूद था? क्या वारदात के पीछे निजी रंजिश है? क्योंकि आमतौर पर दिन के समय रिहायशी इलाकों में इस तरह की वारदात कई सवाल छोड़ जाती है। पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।
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