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Ramgarh (Dhamendra Pradhan) : रामगढ़ जिले के कुजू ओपी क्षेत्र का सेवटा गांव गुरुवार रात से गम में डूबा हुआ है। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक साढ़े तीन माह का मासूम बलराम कुमार किलकारियां भर रहा था, उसी घर से अब सिर्फ रोने-बिलखने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। मां पूजा देवी की सूजी आंखें और पिता अनिल साव का खामोश चेहरा इस दर्द को बयां कर रहा है कि एक पल में उनकी पूरी दुनिया उजड़ गई। गांव की महिलाएं पूजा देवी को संभालने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन मां बार-बार अपने बेटे को याद कर बेसुध हो जा रही थी। कभी वह बच्चे के कपड़ों को सीने से लगा लेतीं, तो कभी रोते हुए यही कहतीं, “हमरा बलराम त ठीक था… अचानक का हो गेल…”
टीका लगवाने गई थी मां
गुरुवार की दोपहर रोज की तरह सामान्य थी। पूजा देवी अपने साढ़े तीन माह के बेटे बलराम को गोद में लेकर सुंडी टोला आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची थीं। गांव की दूसरी महिलाएं भी अपने बच्चों को लेकर वहां मौजूद थीं। करीब 12 बजे एएनएम सरोज तिर्की ने बलराम को टीका लगाया। टीका लगने के बाद पूजा देवी बेटे को लेकर घर लौट आईं। परिजनों के मुताबिक, शाम तक बच्चा सामान्य था। मां उसे गोद में लेकर दुलार करती रही। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि रात इस परिवार के लिए ऐसी आफत लेकर आएगी, जिससे वे कभी उबर नहीं पाएंगे।
आधी रात को बिगड़ी हालत, मां की गोद में थम गई सांसें
परिवार वालों ने बताया कि देर रात अचानक बलराम की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चा बेचैन होने लगा। मां घबराकर उसे सीने से लगाए रही। घर के लोग भी परेशान हो उठे। गांव में रात का सन्नाटा था और परिवार अपने मासूम को बचाने की जद्दोजहद में लगा था। लेकिन रात करीब दो बजे वह पल आया, जिसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। मां की गोद में ही मासूम ने दम तोड़ दिया। बेटे की सांसें थमती देख पूजा देवी जोर-जोर से चीखने लगीं। उनकी आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े चले आए। कुछ ही देर में पूरे गांव में खबर फैल गई कि बलराम अब इस दुनिया में नहीं रहा।
“सुबह तक खेल रहा था बच्चा…”
गांव के लोग भी इस घटना से सदमे में हैं। पड़ोस की महिलाओं की आंखें नम थीं। लोग यही कहते नजर आए कि सुबह तक बच्चा हंस-खेल रहा था, फिर अचानक ऐसा क्या हो गया। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने भारी आवाज में कहा, “इतना छोट बच्चा… भगवान किसी मां-बाप को ई दिन न दिखाये।”
पुलिस पहुंची, लेकिन पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं हुए परिजन
घटना की जानकारी मिलने के बाद कुजू पुलिस मौके पर पहुंची। रवि नारायण शर्मा सशस्त्र बल के साथ गांव आए और पूरे मामले की जानकारी ली। पुलिस ने बच्चे का अंत्यपरीक्षण कराने की सलाह दी, ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। लेकिन बेटे की मौत से टूट चुके परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए। मां-बाप अपने लाल के शरीर को और देर तक अस्पताल या पुलिस प्रक्रिया में नहीं रखना चाहते थे। आखिरकार नम आंखों के बीच मासूम का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
गांव में उठ रहे सवाल, स्वास्थ्य विभाग ने दी सफाई
घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। जितनी जुबां उतनी तरह की बातें हो रही हैं। गांव के कुछ लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि बच्चा पहले पूरी तरह स्वस्थ था और टीका लगने के बाद ही उसकी हालत बिगड़ी। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. रश्मि और एएनएम सरोज तिर्की ने कहा कि जिस वायल से बलराम को टीका लगाया गया था, उसी वायल से चार अन्य बच्चों को भी टीका दिया गया था और वे सभी स्वस्थ हैं। उनका कहना है कि अगर टीके का कोई रिएक्शन होता, तो उसके लक्षण एक से डेढ़ घंटे के भीतर सामने आ जाते। स्वास्थ्य विभाग का यह भी कहना है कि बच्चे की तबीयत बिगड़ने की सूचना परिजनों की ओर से नहीं दी गई थी।
गांव की हवा में अब भी तैर रही मासूम की याद
सेवटा गांव में शुक्रवार को भी हर तरफ उसी मासूम की चर्चा होती रही। घर के बाहर बैठे लोग चुप थे। मां की आंखें दरवाजे की तरफ टिकी थीं, जैसे अब भी उम्मीद हो कि उसका बलराम फिर से मुस्कुराते हुए गोद में आ जाएगा। लेकिन घर की खामोशी बता रही थी कि इस परिवार की खुशियां हमेशा के लिए चली गई हैं।
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