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Ranchi : झारखंड की राजनीति में रविवार को उस वक्त बड़ा बवाल खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को बेहद गंभीर आरोपों से भरा एक पत्र लिखा। इस पत्र में होटवार स्थित रांची सेंट्रल जेल में बंद एक महिला कैदी के साथ जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा कथित यौन शोषण किए जाने और उसके गर्भवती होने का दावा किया गया है। मरांडी ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले को दबाने के लिए जेल प्रशासन के बड़े अधिकारी सक्रिय हैं और सबूत मिटाने की कोशिश की जा रही है।
“जेल के भीतर कानून के रक्षक ही भक्षक बन गए”
अपने पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्हें विश्वसनीय प्रशासनिक सूत्रों से जानकारी मिली है कि न्यायिक अभिरक्षा में बंद एक महिला कैदी का लगातार मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया। आरोप है कि यह शोषण जेल के सबसे बड़े अधिकारी यानी काराधीक्षक द्वारा किया गया, जिसके बाद महिला कैदी गर्भवती हो गई। बाबूलाल मरांडी ने इसे सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि जेल के भीतर लंबे समय से चल रहे “संगठित आपराधिक तंत्र” का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जिस जगह महिलाओं और कैदियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती है, वहीं अगर इस तरह की घटनाएं हों तो यह पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है।
“मामले को दबाने में जेल आईजी की भूमिका”
पत्र में जेल आईजी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि जेल आईजी इस मामले को दबाने, फाइलें गायब करने और आरोपी जेल सुपरिटेंडेंट को बचाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी सामने आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर पूरा ध्यान इसे रफा-दफा करने पर लगाया जा रहा है। मरांडी के मुताबिक, जेल के अंदर जो कर्मचारी और अन्य लोग इस घटनाक्रम के गवाह थे, उन्हें भी चुप कराने के लिए इधर-उधर ट्रांसफर किया जा रहा है।
जेल की सलाखों के भीतर जो हुआ, उसने पूरे झारखंड को शर्मसार कर दिया है। रांची के होटवार जेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद एक महिला कैदी के साथ जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा लगातार शारीरिक शोषण किए जाने और उसके गर्भवती हो जाने की घटना अत्यंत गंभीर, शर्मनाक और मानवता को झकझोर देने वाली है।… pic.twitter.com/JpyFqygakt
— Babulal Marandi (@yourBabulal) May 17, 2026
“इलाज के बहाने सबूत मिटाने की कोशिश”
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि पीड़ित महिला कैदी को बीमारी और इलाज का बहाना बनाकर जेल से बाहर गुप्त स्थानों और अस्पतालों में ले जाया जा रहा है। मरांडी ने दावा किया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि जैविक और फॉरेंसिक सबूत खत्म किए जा सकें। उन्होंने इसे “सुनियोजित साक्ष्य मिटाने की साजिश” बताया।
“कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार भी कटघरे में होगी”
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आरोपी जेल सुपरिटेंडेंट और जेल आईजी को तुरंत पद से हटाकर गिरफ्तार नहीं किया गया, तो यह माना जाएगा कि सरकार और उसके शीर्ष अधिकारी भी इस पूरे मामले में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है और अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय आयोगों और अदालतों से हस्तक्षेप की मांग
बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जेलों में महिलाओं के साथ होने वाले कथित उत्पीड़न और अवैध गतिविधियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। इन गंभीर आरोपों के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। हालांकि खबर लिखे जाने तक राज्य सरकार, जेल प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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