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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कभी घर के कामकाज तक सीमित रहने वाली महिलाओं के हाथों में अब सिर्फ जिम्मेदारियां नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद भी है। बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड की एक पहल ने आसपास के गांवों की 20 महिलाओं की जिंदगी में नया भरोसा जगा दिया है। कंपनी ने सीएसआर कार्यक्रम के तहत इंद्रा नगर स्थित सिलाई ट्रेनिंग सेंटर में महिलाओं के बीच सिलाई मशीनों का वितरण किया। यह सिर्फ मशीन बांटने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन सपनों को सहारा देने की कोशिश थी जो आर्थिक मजबूरियों के कारण अक्सर अधूरे रह जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की आंखों में खुशी और चेहरे पर आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था। किसी ने पहली बार अपने हाथों से कमाई करने की उम्मीद जताई, तो किसी ने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने का सपना देखा।
घर की जिम्मेदारियों के बीच अब कमाई का मौका
ग्रामीण इलाकों की कई महिलाएं हुनर होने के बावजूद संसाधनों की कमी से आगे नहीं बढ़ पातीं। सिलाई का काम जानने के बाद भी उनके पास मशीन नहीं होती, जिससे वे रोजगार शुरू नहीं कर पातीं। ऐसे में बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड की यह पहल उनके लिए बड़ा सहारा बनकर सामने आई है। अब ये महिलाएं घर बैठे कपड़ों की सिलाई, स्कूल ड्रेस, ब्लाउज और दूसरे छोटे काम कर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगी। इससे न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

दस्ताने बनाकर कंपनी को देंगी सप्लाई
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात कंपनी की भविष्य की योजना रही। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में प्लांट में इस्तेमाल होने वाले औद्योगिक दस्तानों का निर्माण भी इन महिलाओं से कराया जाएगा। कंपनी महिलाओं को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराएगी और तैयार दस्तानों को खुद खरीदेगी। यानी महिलाओं को बाजार ढूंढने की चिंता नहीं होगी। उन्हें नियमित काम और तय आय मिल सकेगी। ग्रामीण महिलाओं के लिए यह मॉडल स्वरोजगार के साथ स्थायी रोजगार का रास्ता खोल सकता है।
“महिलाएं मजबूत होंगी तो समाज भी मजबूत होगा”
कार्यक्रम में मौजूद कंपनी अधिकारियों ने कहा कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विकास की बुनियाद है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं तो उसका असर पूरे परिवार और समाज पर दिखाई देता है। अधिकारियों ने कहा कि कंपनी हमेशा स्थानीय समुदाय के विकास के लिए काम करती रही है और आगे भी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक उत्थान से जुड़ी योजनाएं चलाती रहेगी।

महिलाओं के चेहरे पर दिखी नई उम्मीद
सिलाई मशीन मिलने के बाद महिलाओं ने खुशी जताई। कई महिलाओं ने कहा कि अब वे दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगी। एक महिला ने कहा, “पहले सिलाई सीखकर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे। अब मशीन मिल गई है तो घर से ही काम शुरू करेंगे।” वहीं दूसरी महिला ने कहा कि अगर दस्ताने बनाने का काम शुरू होता है तो गांव की कई और महिलाओं को भी रोजगार मिल सकेगा।
गांव में चर्चा का विषय बनी पहल
कार्यक्रम के बाद इलाके में इस पहल की काफी चर्चा रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कंपनियां इसी तरह आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार से जोड़ें तो ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदल सकती है।
कार्यक्रम में राकेश गुप्ता, सीनियर जीएम सीएसआर, शुभम सिंह, सूरज प्रसाद, अदिति, प्रशिक्षक ज्योति सहित स्थानीय ग्रामीण और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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