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Home » ‘शहीदों के सपनों वाला झारखंड गायब है’, दुर्गा सोरेन सेना अधिवेशन में गरजीं सीता
झारखंड

‘शहीदों के सपनों वाला झारखंड गायब है’, दुर्गा सोरेन सेना अधिवेशन में गरजीं सीता

May 21, 2026No Comments4 Mins Read
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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ के रॉयल रेसिडेंसी का माहौल गुरुवार को पूरी तरह राजनीतिक और भावनात्मक रंग में रंगा नजर आया। मंच पर झारखंड आंदोलन की यादें थीं, सामने बैठे कार्यकर्ताओं की आंखों में गुस्सा और उम्मीद दोनों दिख रही थी। मौका था दिवंगत ड्रग सोरेन की पुण्यतिथि पर आयोजित दुर्गा सोरेन सेना के अधिवेशन का। कार्यक्रम में एक तरफ आंदोलन की विरासत को याद किया गया, तो दूसरी तरफ मौजूदा झारखंड की स्थिति पर सवाल भी खड़े किए गए। सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं पूर्व जामा विधायक और भाजपा नेता सीता सोरेन। उन्होंने अपने संबोधन में सड़क, खनिज, भ्रष्टाचार और जनता की परेशानियों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला।

गांधी चौक से शुरू हुआ राजनीतिक संदेश

कार्यक्रम की शुरुआत पाकुड़ के गांधी चौक से हुई। यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा का स्नान कराया गया और माल्यार्पण किया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं का काफिला रॉयल रेसिडेंसी पहुंचा, जहां दिशोम गुरु शिबू सोरेन और दिवंगत दुर्गा सोरेन की तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मंच पर जैसे ही नेताओं का संबोधन शुरू हुआ, सभा का माहौल आंदोलन की यादों और वर्तमान राजनीति के सवालों से भर गया।

“जिस झारखंड का सपना देखा था, वह कहीं दिखाई नहीं देता”

मुख्य अतिथि जयश्री सोरेन ने कहा कि अलग झारखंड राज्य बनाने के पीछे सिर्फ राजनीतिक मकसद नहीं था। सपना था कि यहां के आदिवासी, गरीब, मजदूर और गांव के लोगों को उनका अधिकार मिलेगा। लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं कि जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आंदोलन के दौरान अपना सब कुछ दांव पर लगाया, उनके सपनों का झारखंड अब कहीं दिखाई नहीं देता। गांवों में आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

सड़क पर बरसीं सीता सोरेन

सभा में सबसे ज्यादा तालियां उस वक्त गूंजीं, जब Sita Soren ने पाकुड़-दुमका सड़क का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कभी इस सड़क पर सफर करना आसान था, लेकिन अब हालत ऐसी हो चुकी है कि लोग डरते-डरते सफर करते हैं। उन्होंने कहा, “आज सड़कें गड्ढों में बदल चुकी हैं। आम लोग परेशान हैं, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ रहा। सड़कें सिर्फ भारी वाहनों और माल ढुलाई के लिए बची हैं।” सभा में मौजूद कई लोगों ने भी सड़क की खराब स्थिति को लेकर नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं।

“झारखंड की संपदा जा रही, लेकिन गांव खाली हाथ”

सीता सोरेन ने अपने भाषण में खनिज संपदा और फंड के इस्तेमाल का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की जमीन से कोयला और दूसरे खनिज निकाले जा रहे हैं, लेकिन जिन इलाकों से यह संपदा निकलती है, वहां के लोगों की जिंदगी नहीं बदल रही। उन्होंने कहा कि सीएसआर और डीएमएफटी फंड का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा। गांवों में आज भी पीने का पानी, अस्पताल, सड़क और रोजगार जैसी सुविधाओं की कमी है। उनका कहना था कि झारखंड की संपदा का सबसे पहला हक यहां के लोगों का होना चाहिए।

दुर्गा सोरेन के नाम पर संगठन को मजबूत करने की कोशिश

अधिवेशन सिर्फ श्रद्धांजलि सभा तक सीमित नहीं रहा। मंच से साफ संदेश देने की कोशिश हुई कि दुर्गा सोरेन सेना को गांव-गांव तक मजबूत किया जाएगा। सीता सोरेन ने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता की आवाज उठाने के लिए संगठन को फिर से मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक गांव और गरीब की आवाज मजबूती से नहीं उठेगी, तब तक झारखंड के असली मुद्दे पीछे ही रहेंगे। सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी संगठन को मजबूत करने का भरोसा दिलाया।

कार्यकर्ताओं की भीड़ और आंदोलन जैसा माहौल

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभा स्थल के बाहर भी लोगों की भीड़ लगी रही। कई कार्यकर्ता झारखंड आंदोलन से जुड़े पुराने नारों के साथ पहुंचे थे। मौके पर जिला अध्यक्ष उज्ज्वल भगत, जिला महामंत्री परमजीत कुमार मिश्रा, जिला सचिव नवीन कुमार सिंह, जिला उपाध्यक्ष आदित्य पांडे, डिंपल सिंह, प्रसेनजीत प्रमाणिक, असगर शेख, कुंदन सिंह, कृष्ण यादव और तारीक परवाज समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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