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Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित SSC GD कांस्टेबल परीक्षा 2026 के दौरान ऐसा हाईटेक फर्जीवाड़ा सामने आया है। टाटीसिलवे थाना क्षेत्र के डोल बगीचा स्थित एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र में चल रही परीक्षा के दौरान पुलिस ने ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कंप्यूटर सिस्टम को रिमोट एक्सेस के जरिए हैक कर अभ्यर्थियों को पास कराने का खेल चला रहा था। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक परीक्षार्थी, परीक्षा केंद्र का इनविजिलेटर, सेंटर हेड और एक आईटी कर्मी शामिल है। पुलिस का दावा है कि यह कोई साधारण नकल कांड नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के नेटवर्क से जुड़ा सुनियोजित साइबर एग्जाम रैकेट है।
सुबह 10 बजे मिली सूचना, फिर हरकत में आई पुलिस
21 मई की सुबह करीब 10 बजे रांची एसएसपी राकेश रंजन को गुप्त सूचना मिली कि टाटीसिलवे स्थित GENIUS INSTITUTE OF TECHNOLOGY में आयोजित SSC (GD/Constable) CAPF परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। सूचना मिलते ही रूरल एसपी गौरव गोस्वामी के निर्देशन और सीनियर डीएसपी अमर कुमार पांडेय के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। जब पुलिस टीम परीक्षा केंद्र पहुंची, तब परीक्षा शुरू हो चुकी थी। लेकिन जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसी गतिविधि दिखाई दी, जिसने पूरे मामले का राज खोल दिया।
परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले री-स्टार्ट हुआ सिस्टम
जांच में पता चला कि प्रथम तल स्थित लैब-1 में बैठे एक अभ्यर्थी के कंप्यूटर सिस्टम को परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले अचानक री-स्टार्ट कराया गया था। चौंकाने वाली बात यह थी कि यह काम खुद इनविजिलेटर संजीत कुमार ने कराया था। तकनीकी जांच में सामने आया कि सिस्टम को रिमोटली एक्सेस किया जा रहा था। यानी परीक्षा केंद्र में बैठा अभ्यर्थी सवाल देख रहा था, जबकि कहीं और बैठा व्यक्ति सिस्टम को नियंत्रित कर रहा था। स्क्रीन मिररिंग और रिमोट कंट्रोलिंग के जरिए सवाल हल कर जवाब भेजे जा रहे थे। यहीं से पुलिस को पूरे रैकेट की भनक लग गई।
सड़क पार किराए के कमरे में चल रहा था ‘ऑपरेशन पास’
पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो एक और बड़ा खुलासा हुआ। परीक्षा केंद्र के ठीक सामने सड़क पार एक किराए के मकान में पूरा कंट्रोल रूम बनाया गया था। वहां सेंटर हेड विकास कुमार और आईटी कर्मी मुन्ना राज कंप्यूटर सिस्टम के साथ मौजूद थे। बताया जा रहा है कि परीक्षा केंद्र के कंप्यूटरों को इंटरनेट और आईपी एड्रेस के जरिए उसी कमरे से जोड़ा गया था। वहां बैठे लोग लाइव स्क्रीन देख रहे थे और प्रश्नों को हल कर सीधे सिस्टम में एक्सेस देने की कोशिश कर रहे थे। यानी परीक्षा हॉल में अभ्यर्थी सिर्फ बैठा था, जबकि असली परीक्षा सड़क पार कमरे में चल रही थी। पुलिस ने तत्काल छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से कंप्यूटर मॉनिटर, सीपीयू, मोबाइल फोन, वाईफाई डिवाइस, बैंक चेक और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए।
6 से 10 लाख रुपये में होती थी ‘गारंटी डील’
पूछताछ में गिरफ्तार परीक्षार्थी मृत्युंजय कुमार यादव ने पुलिस को बताया कि बिहार के एक बिचौलिए ने उससे 6 लाख रुपये लेकर परीक्षा पास कराने का वादा किया था। इसके बदले उसका मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी अपने कब्जे में रख लिया गया था। पुलिस के मुताबिक गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने के नाम पर 6 लाख से 10 लाख रुपये तक वसूलता था। अभ्यर्थियों की सेटिंग बिचौलियों के जरिए होती थी और परीक्षा केंद्र के अंदर मौजूद कर्मचारियों की मदद से पूरा खेल संचालित किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं…
- मृत्युंजय कुमार यादव — परीक्षार्थी, निवासी सिवान (बिहार)
- संजीत कुमार — इनविजिलेटर, निवासी नालंदा
- विकास कुमार — सेंटर हेड, निवासी नालंदा
- मुन्ना राज — आईटी कर्मी, निवासी पटना
बरामद सामान ने खोली साजिश की परतें
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं…
- 2 कंप्यूटर मॉनिटर
- 3 सीपीयू
- 1 ब्रॉडबैंड/वाईफाई डिवाइस
- 2 की-बोर्ड
- 2 माउस
- 3 एंड्रॉयड मोबाइल फोन
- एडमिट कार्ड और आधार कार्ड
- 5 बैंक चेक
- 2 अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र
अब नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश
रूरल एसपी गौरव गोस्वामी ने कहा कि यह एक बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है। पुलिस को कई अन्य लोगों की जानकारी मिली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने देश के अन्य राज्यों में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की है या नहीं।
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