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Patna : सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में निवेश बढ़ाने और उद्योग लगाने की राह आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उनकी अध्यक्षता में ऐसा फैसला लिया गया, जिससे उद्योगों से जुड़ी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी। अब किसी निवेशक को उद्योग लगाने के लिए महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने 30 दिनों की समय सीमा तय कर दी है। यदि तय समय में विभाग फैसला नहीं लेते हैं तो निवेशक को स्वतः मंजूरी मिल जाएगी। सीएम सम्राट चौधरी ने फैसले को बिहार के औद्योगिक विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने वालों को अब अनावश्यक देरी और प्रशासनिक जटिलताओं से छुटकारा मिलेगा।
सीएम सम्राट चौधरी बोले- निवेशकों को नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
राज्य सरकार ने बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम, 2016 के तहत राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) सचिवालय को पूरी तरह सशक्त एकल नोडल एजेंसी बनाने की मंजूरी दे दी है। इसका सीधा मतलब है कि उद्योगों से जुड़ी लगभग सभी प्रक्रियाएं अब एक ही मंच से पूरी होंगी। सीएम ने कहा कि निवेशकों को अलग-अलग विभागों में जाकर मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। SIPB सचिवालय सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा और निवेशकों के लिए पूरी प्रक्रिया को आसान बनाएगा।
30 दिन में फैसला लेना होगा, नहीं तो अपने आप मिलेगी मंजूरी
नई व्यवस्था के तहत SIPB सचिवालय द्वारा किसी प्रस्ताव की तकनीकी जांच और अनुशंसा किए जाने के बाद संबंधित विभाग या सक्षम प्राधिकार को 30 दिनों के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा। मुसीएम सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि यह केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं है, बल्कि कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था होगी। यानी विभाग चाहकर भी फाइलों को लंबित नहीं रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि निवेशकों को समय पर निर्णय मिले और उनकी परियोजनाएं बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ें।
विभाग ने देर की तो SIPB देगा ‘डीम्ड क्लीयरेंस’
फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर मंजूरी देने में विफल रहता है तो SIPB सचिवालय निवेशक को ‘डीम्ड क्लीयरेंस’ जारी कर देगा। इसका मतलब यह होगा कि परियोजना को स्वीकृत माना जाएगा और संबंधित विभाग को उस फैसले का पालन करना होगा। बाद में उस मंजूरी पर पुनर्विचार करने का अधिकार भी विभाग के पास नहीं रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य में निवेश का माहौल मजबूत होगा।
अब एक ही छत के नीचे होंगे कई विभागों के अधिकारी
मुख्यमंत्री ने नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए एक और अहम फैसला लिया है। उद्योगों से जुड़े तकनीकी और नियामक विभागों के अधिकारियों को सीधे SIPB सचिवालय में तैनात किया जाएगा। ये अधिकारी औद्योगिक विकास आयुक्त की निगरानी में काम करेंगे। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा और मंजूरी से जुड़े फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
हर मंजूरी के लिए बनेगी स्पष्ट SOP
सरकार उद्योगों की स्थापना, संचालन और विस्तार से जुड़ी सभी अनुमतियों और लाइसेंस के लिए एकीकृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी लागू करेगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। निवेशकों को पहले से पता रहेगा कि किस काम के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए और कितने समय में मंजूरी मिलेगी।
रोजगार और निवेश बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सम्राट चौधरी ने कहा कि औद्योगिक विकास ही बिहार की आर्थिक समृद्धि और युवाओं के रोजगार का सबसे मजबूत आधार है। राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार को देश और दुनिया के निवेशकों के लिए पसंदीदा निवेश केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बड़े उद्योग आएंगे और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का मानना है कि यह फैसला विकसित और आत्मनिर्भर बिहार के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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