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Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को बड़ी राहत मिली है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनके दस्तावेजों पर कुछ आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिसके बाद विधानसभा प्रभारी सचिव और रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार ने उनके नामांकन को अस्थायी रूप से रोक दिया था। बताया गया कि नामांकन पत्र से जुड़े तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। नाथवानी ने इन सभी सवालों का जवाब और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई। जवाबों की समीक्षा के बाद रिटर्निंग ऑफिसर संतुष्ट हुए और उनके नामांकन पत्र को वैध घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही कांग्रेस की ओर से उठाई गई आपत्तियों को भी खारिज कर दिया गया।
कांग्रेस ने उठाए थे कई सवाल
नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद रांची पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पक्ष मजबूत था और वह इसी संबंध में अपनी दलीलें रखने आए थे। हालांकि उनके अनुसार जब वे सुनवाई स्थल पहुंचे, तब तक प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि संबंधित पक्षों की बात पहले ही सुनी जा चुकी थी। वहीं कांग्रेस की ओर से पैरवी कर रहे वकीलसुरेंद्र सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि नाथवानी के दस्तावेजों में कई कमियां थीं। उनका कहना था कि उम्मीदवार के नाम के उल्लेख में भी विसंगति दिखाई दी, जहां “परिमल नाथवानी” की जगह “नाथवानी परिमल” लिखा गया था।
हलफनामे को लेकर उठी आपत्ति
कांग्रेस की सबसे बड़ी आपत्ति नाथवानी के हलफनामे को लेकर थी। चौहान का कहना था कि चुनाव संचालन नियम, 1961 के तहत दाखिल किए जाने वाले फॉर्म-26 में उम्मीदवार को अपनी संपत्ति, जीवनसाथी, परिवार और आश्रितों से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होती है। कांग्रेस का आरोप था कि नाथवानी ने अपने हलफनामे में कई कॉलम खाली छोड़ दिए थे। दस्तावेज में केवल उनके और उनकी पत्नी से जुड़ी जानकारी दी गई थी। इसी आधार पर कांग्रेस ने दावा किया कि हलफनामा अधूरा है और नामांकन को अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। हालांकि रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्टीकरण मिलने के बाद इस आपत्ति को स्वीकार नहीं किया।
अब मैदान में तीन उम्मीदवार
नामांकन प्रक्रिया की जांच पूरी होने के बाद अब चुनावी मैदान में तीन उम्मीदवार रह गए हैं।
- झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम
- कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा
- भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी
इन तीनों उम्मीदवारों के बीच अब राज्यसभा की दो सीटों के लिए मुकाबला होगा।
आंकड़े क्या कहते हैं?
अगर विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 56 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर गठबंधन दोनों सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में नजर आता है। दूसरी ओर एनडीए के पास 24 विधायक हैं। ऐसे में नाथवानी को जीत हासिल करने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। यही वजह है कि उनकी उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा बनी हुई है।
क्रॉस वोटिंग पर टिकी नजरें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में केवल संख्या बल ही निर्णायक नहीं होता। कई बार प्राथमिकता वोट और विधायकों की रणनीति भी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। नाथवानी के मैदान में बने रहने से चुनाव दिलचस्प हो गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मतदान के दिन विभिन्न दलों के विधायक किस तरह का रुख अपनाते हैं। फिलहाल क्रॉस वोटिंग और अन्य संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन किसी भी तरह के खरीद-फरोख्त या हॉर्स ट्रेडिंग के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नतीजों का इंतजार
नामांकन विवाद खत्म होने के बाद अब राज्यसभा चुनाव पूरी तरह राजनीतिक गणित और विधायकों के मतदान पर आ गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी संख्या के भरोसे आश्वस्त दिख रहा है, जबकि परिमल नाथवानी की मौजूदगी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के दौरान राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं और आखिरकार राज्यसभा की दोनों सीटों पर कौन जीत दर्ज करता है।
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