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Patna : बिहार में अब राजस्व सेवाएं लोगों के और करीब पहुंचने वाली हैं। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि हर पंचायत में कंप्यूटर ऑपरेटर सह क्लर्क की नियुक्ति की जाएगी, ताकि लोगों को जमीन और राजस्व से जुड़े कामों के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि इस पहल से दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी जैसी ऑनलाइन सेवाएं सीधे पंचायत स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।
हर पंचायत में मिलेगी राजस्व सेवाओं की सुविधा
दरभंगा और शेखपुरा जिले के राजस्व कार्यों की समीक्षा के दौरान मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आम लोगों को उनकी पंचायत में ही अधिकतर राजस्व सेवाएं मिल जाएं। इसके लिए पंचायत स्तर पर कंप्यूटर ऑपरेटर सह क्लर्क की नियुक्ति की जाएगी। इससे ऑनलाइन आवेदन करने, दस्तावेजों की जांच कराने और विभिन्न राजस्व सेवाओं का लाभ लेने में लोगों को काफी सहूलियत होगी। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अक्सर छोटे-छोटे कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी।
कर्मचारियों की कमी दूर करने की तैयारी
राजस्व विभाग में लंबे समय से कर्मचारियों की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। इसे देखते हुए सरकार ने 8054 राजस्व कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव राज्य कर्मचारी चयन आयोग को भेज दिया है। डॉ. जायसवाल ने उम्मीद जताई कि बड़ी संख्या में नियुक्तियां होने के बाद विभाग के कामकाज में तेजी आएगी और जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा पहले की तुलना में अधिक तेजी से किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मानव संसाधन मिलने से लंबित मामलों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
अतिक्रमण के मामलों पर विशेष जोर
समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि अतिक्रमण से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन की सुरक्षा सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इस दिशा में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में तेजी लाई जाए और जहां भी शिकायतें लंबित हैं, उनका जल्द समाधान किया जाए।
लंबित मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं
मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी। दाखिल-खारिज, परिमार्जन, लोक शिकायत और अन्य राजस्व मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों को पारदर्शी और समय पर सेवाएं देना है। अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
15 दिन बाद फिर होगी समीक्षा
डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि 15 दिनों के बाद जिलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। इस दौरान जिन जिलों या अधिकारियों के कामकाज में अपेक्षित सुधार नहीं दिखेगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि समीक्षा का उद्देश्य केवल आंकड़ों की जांच करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल रहा है या नहीं।
कई महत्वपूर्ण योजनाओं और मामलों की हुई समीक्षा
बैठक में अतिक्रमण हटाने, सरकारी भूमि की सुरक्षा, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, ई-मापी, अभियान बसेरा-2, राजस्व महाअभियान, लोक शिकायत और आरसीएमएस न्यायालयों में लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। विभागीय सचिव जय सिंह ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का जल्द से जल्द निष्पादन किया जाए और तय समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मामलों में तेजी और पारदर्शिता बनाए रखना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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