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Home » झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने किया रिजाइन, CS को भेजा इस्तीफा
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झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने किया रिजाइन, CS को भेजा इस्तीफा

June 14, 2026No Comments4 Mins Read
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महाधिवक्ता
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Ranchi : झारखंड की राजनीति और कानूनी गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्य सचिव को भेज दिया है। महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से भी उनके इस्तीफे की पुष्टि कर दी गई है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्होंने इस्तीफा किन कारणों से दिया है। न तो उनकी ओर से कोई सार्वजनिक बयान आया है और न ही राज्य सरकार ने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा की है। ऐसे में राजनीतिक और कानूनी हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

करीब साढ़े छह साल से निभा रहे थे बड़ी जिम्मेदारी

राजीव रंजन को हेमंत सोरेन सरकार ने 7 फरवरी 2020 को झारखंड का महाधिवक्ता नियुक्त किया था। 2019 विधानसभा चुनाव के बाद जब नई सरकार बनी, तब उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। महाधिवक्ता के तौर पर उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से कई महत्वपूर्ण मामलों में अदालतों में पक्ष रखा। संवैधानिक मुद्दों से लेकर प्रशासनिक और नीतिगत मामलों तक, वे सरकार के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका में रहे। झारखंड हाईकोर्ट सहित विभिन्न न्यायिक मंचों पर उन्होंने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।

कौन हैं राजीव रंजन?

राजीव रंजन झारखंड के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ताओं में शामिल हैं। उनका जन्म 29 दिसंबर 1968 को हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई रांची के डीएवी जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली में हुई। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से रसायन विज्ञान में स्नातक (ऑनर्स) की पढ़ाई की। इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। वर्ष 1994 में उन्होंने अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और कानूनी पेशे में कदम रखा।

कानून के कई क्षेत्रों में है मजबूत पकड़

करीब तीन दशक के अपने कानूनी करियर में राजीव रंजन ने संवैधानिक कानून, सेवा कानून, श्रम कानून, कंपनी कानून, दीवानी और आपराधिक मामलों में काम किया है। वे वर्ष 2011 से 2012 तक झारखंड के अपर महाधिवक्ता भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार के अधिवक्ता और गृह विभाग के विशेष अधिवक्ता के रूप में भी सेवाएं दी हैं। कानूनी मामलों में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें राज्य के प्रमुख कानून विशेषज्ञों में गिना जाता है।

इस्तीफे की वजह पर बनी हुई है चुप्पी

राजीव रंजन के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्होंने यह फैसला क्यों लिया। फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। महाधिवक्ता कार्यालय ने सिर्फ इस्तीफे की पुष्टि की है, लेकिन कारणों को लेकर कुछ नहीं कहा गया है। वहीं राज्य सरकार की तरफ से भी अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में लोगों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि सरकार आगे क्या फैसला लेती है और नए महाधिवक्ता की नियुक्ति कब होती है।

भाजपा ने सरकार को घेरा

राजीव रंजन के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि झारखंड में शासन चलाने के बजाय संवैधानिक पदों पर लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में “म्यूजिकल चेयर” जैसा माहौल बना हुआ है, जहां किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का भविष्य सुरक्षित नजर नहीं आता।

श्वेत पत्र जारी करने की मांग

भाजपा ने इस पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि राजीव रंजन के कार्यकाल को लेकर एक श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए। भाजपा ने मांग की है कि सरकार बताए कि उनके कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार ने कितने मुकदमों में जीत हासिल की और कितने मामलों में हार का सामना करना पड़ा। साथ ही बाहरी वकीलों और कानूनी सलाहकारों पर कितना खर्च किया गया और उससे राज्य को क्या फायदा हुआ, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जाए। भाजपा ने यह सवाल भी उठाया है कि अगर राजीव रंजन का काम संतोषजनक था तो उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया, और अगर उनका काम संतोषजनक नहीं था तो उन्हें इतने लंबे समय तक इस पद पर क्यों बनाए रखा गया।

इसे भी पढ़ें : खान सर कोचिंग हमले के आरोपी की नेपाल के होटल में मिली लाश, तफ्तीश शुरू

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