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Palamu (Aftab Alam) : बड़े सपने देखने के लिए बड़े शहर में जन्म लेना जरूरी नहीं होता। अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत लगातार की जाए, तो छोटे से गांव का एक युवा भी देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं तक पहुंच सकता है। पलामू जिले के बारा गांव के रहने वाले रजनीश कुमार ने यही कर दिखाया है। SEBI यानि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड में ऑफिसर ग्रेड ए (असिस्टेंट मैनेजर, लीगल) के पद पर उनका चयन हुआ है। बताया जा रहा है कि साल 2026 की इस भर्ती में झारखंड और बिहार से चयनित होने वाले वह इकलौते अभ्यर्थी हैं। उनकी सफलता ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे पलामू और झारखंड को गौरवान्वित किया है।
गांव की गलियों से शुरू हुआ सफर, मंजिल बनी देश की शीर्ष संस्था
रजनीश कुमार का बचपन पलामू जिले के बारा गांव में बीता। गांव के माहौल में रहकर उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यह तय कर लिया था कि उन्हें कुछ अलग करना है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही। उन्होंने पहले जियोलॉजी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उनका रुझान कानून की ओर बढ़ा। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित कैंपस लॉ सेंटर में दाखिले के लिए तैयारी की और सफलता हासिल की। यहां से एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कानून के क्षेत्र में अपनी पेशेवर यात्रा शुरू की।
दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत के साथ जारी रखी तैयारी
रजनीश ने 1 सितंबर 2025 से दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। अदालत की व्यस्त दिनचर्या के बीच भी उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नजरअंदाज नहीं किया। दिन में वकालत और बाकी समय पढ़ाई, यही उनकी दिनचर्या बन गई। लगातार मेहनत और अनुशासन का ही नतीजा रहा कि उन्होंने सेबी जैसी प्रतिष्ठित संस्था की कठिन चयन प्रक्रिया को पार कर ऑफिसर ग्रेड ए (असिस्टेंट मैनेजर, लीगल) के पद पर जगह बनाई। यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
पिता न्याय व्यवस्था से जुड़े, बेटे ने भी चुना कानून का रास्ता
रजनीश के पिता शिव शंकर राम लातेहार व्यवहार न्यायालय में प्रभारी जिला लोक अभियोजक के पद पर कार्यरत हैं। घर का माहौल कानून और न्याय व्यवस्था से जुड़ा रहा, जिसका असर रजनीश पर भी पड़ा। उन्होंने भी विधि को अपना करियर बनाया और आज उसी क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्था में अपनी जगह बना ली। यह सफलता परिवार के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि बड़े भाई मनीष कुमार भी झारखंड सहायक लोक अभियोजक की प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि दोनों भाई बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर रहे हैं और हमेशा मेहनत को प्राथमिकता दी।
छोटे गांव के युवाओं के लिए बड़ी सीख
रजनीश कुमार की कहानी सिर्फ एक चयन की कहानी नहीं है। यह उन हजारों युवाओं की उम्मीद भी है जो छोटे गांवों और कस्बों में रहकर बड़े सपने देखते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अगर दिशा सही हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता दूर नहीं रहती। आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, ऐसे समय में पलामू के इस युवा ने यह साबित किया है कि सफलता का रास्ता मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से होकर ही गुजरता है।
इलाके में जश्न, हर तरफ मिल रही बधाइयां
रजनीश कुमार के चयन की खबर मिलते ही पलामू और लातेहार के अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया। सभी ने रजनीश को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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