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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : फैक्ट्री की मशीनों की आवाज, उत्पादन का दबाव और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच जब कर्मचारियों को खेल का मंच मिला, तो माहौल पूरी तरह बदल गया। कहीं कैरम बोर्ड पर स्ट्राइकर की सटीक टक्कर गूंज रही थी, तो कहीं शतरंज की बिसात पर हर चाल सोच-समझकर चली जा रही थी। यह नजारा था रामगढ़ के BFCL यानी बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड में आयोजित ‘अरुणा बुधिया मेमोरियल कैरम एंड चेस टूर्नामेंट 2026’ का, जहां खेल सिर्फ जीत-हार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों के बीच आपसी जुड़ाव, विश्वास और टीम भावना को भी नई मजबूती मिली। कई दिनों तक चले इस आयोजन में कंपनी के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हर मुकाबले में जीतने की चाह जरूर दिखी, लेकिन उससे भी ज्यादा नजर आई खेल भावना। यही वजह रही कि पूरा टूर्नामेंट उत्साह, अनुशासन और सकारात्मक माहौल के बीच संपन्न हुआ।

काम के साथ खेल का संतुलन, यही रही आयोजन की सबसे बड़ी खासियत
औद्योगिक संस्थानों में अक्सर कर्मचारियों का अधिकतर समय कामकाज में ही बीत जाता है। ऐसे में जब उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और सहकर्मियों के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का मौका मिलता है, तो उसका असर सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कार्यस्थल के माहौल पर भी दिखाई देता है। BFCL प्रबंधन ने भी इसी सोच के साथ इस टूर्नामेंट का आयोजन किया। उद्देश्य था कि कर्मचारी अपने दैनिक कामकाज से कुछ समय निकालकर तनाव से दूर रहें, एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानें और टीम के रूप में मजबूत बनें। यही कारण रहा कि प्रतियोगिता शुरू होने से लेकर फाइनल मुकाबलों तक कर्मचारियों का उत्साह लगातार बना रहा।

कैरम में दिखी सटीक निशानेबाजी, शतरंज में चली रणनीति की चालें
इस बार प्रतियोगिता में कैरम सिंगल्स में 70 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। वहीं कैरम डबल्स में 16 टीमों ने अपनी किस्मत आजमाई। शतरंज प्रतियोगिता में 36 प्रतिभागियों ने दिमागी खेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। हर मुकाबला रोमांच से भरपूर रहा। कैरम बोर्ड पर एक-एक गोटी को पॉकेट में डालने के लिए खिलाड़ियों ने शानदार नियंत्रण और धैर्य दिखाया। वहीं शतरंज में कई मुकाबले आखिरी चाल तक पहुंचे, जहां खिलाड़ियों की रणनीति और एकाग्रता की असली परीक्षा हुई। आखिरकार शतरंज प्रतियोगिता में ऋषभ गुप्ता विजेता बने। कैरम सिंगल्स में जितेंद्र प्रसाद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। वहीं कैरम डबल्स में जितेंद्र प्रसाद और सोमनाथ रॉय की जोड़ी ने बेहतरीन तालमेल दिखाकर खिताब अपने नाम किया।

सम्मान सिर्फ विजेताओं का नहीं, हर प्रतिभागी के उत्साह का भी हुआ
समापन समारोह में विजेताओं को सम्मानित किया गया। हालांकि मंच पर सिर्फ ट्रॉफी जीतने वालों की ही नहीं, बल्कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले हर कर्मचारी की सराहना हुई। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता की सबसे बड़ी सफलता भागीदारी होती है और इस टूर्नामेंट में कर्मचारियों ने पूरे मन से भाग लेकर इसे सफल बनाया।
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों और विभागाध्यक्षों ने कहा कि खेल इंसान को केवल शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं बनाता, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत करता है। शतरंज जैसे खेल रणनीतिक सोच विकसित करते हैं, जबकि कैरम एकाग्रता, धैर्य और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाता है। यही गुण कार्यस्थल पर भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करते हैं।
खेल से मजबूत होती है टीम, यही संदेश दे गया टूर्नामेंट
BFCL प्रबंधन का मानना है कि किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी ताकत उसके कर्मचारी होते हैं। जब कर्मचारी एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल से काम करते हैं, तो उसका सीधा असर संस्थान की कार्यक्षमता पर पड़ता है। खेल इसी तालमेल को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। प्रबंधन ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और सहयोगियों का आभार जताया। साथ ही भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी कर्मचारियों के लिए ऐसे खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि कार्यस्थल का माहौल सकारात्मक बना रहे और कर्मचारियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता रहे।
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