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Ranchi : रांची के दरभंगा हाउस स्थित CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड मुख्यालय में आज का नजारा आम दिनों जैसा बिल्कुल नहीं था। फाइलों और बैठकों के बीच भागती रहने वाली जिंदगी आज कुछ पलों के लिए ठहर सी गई थी। मौका था जून के इस आखिरी दिन कंपनी को अपनी जिंदगी के सबसे बेहतरीन साल देने वाले 110 साथियों की विदाई का। मुख्यालय में आयोजित भव्य समारोह में जहां 6 कर्मियों को विदा किया गया, वहीं सीसीएल के अलग-अलग कोलियरी क्षेत्रों में भी 104 कर्मियों को उनके साथियों ने पलकों पर बिठाकर विदाई दी। शाम होते-होते जब विदाई की औपचारिकताएं शुरू हुईं, तो माहौल में एक अजीब सी खामोशी और अपनापन तैर गया। एक तरफ काम के बोझ से मुक्ति की खुशी थी, तो दूसरी तरफ बरसों पुराने साथियों और उस दफ्तर से छूटने का दर्द, जो अब तक उनका दूसरा घर बन चुका था।
जब स्क्रीन पर तैर गईं 30 साल की यादें
इस विदाई समारोह को और भी यादगार बना दिया वहां दिखाई गई एक शॉर्ट फिल्म ने। जैसे ही हॉल का अंधेरा बढ़ा और स्क्रीन पर लाइट चमकी, वैसे ही रिटायर होने वाले कर्मचारियों के चेहरों पर एक चमक आ गई। इस फिल्म में इन कर्मियों ने अपने नौकरी के शुरुआती दिनों के संघर्ष, कोयला खदानों से जुड़ी चुनौतियां और टीम के साथ मिलकर हासिल की गई जीतों की कहानियां साझा कीं। फिल्म में जब एक कर्मचारी ने भावुक होकर कहा, “कल से जब सुबह उठेंगे, तो दफ्तर आने की जल्दी नहीं होगी, पर यादें हमेशा यहीं रहेंगी,” तो हॉल में बैठे कई अधिकारियों और सहयोगियों की आंखें भी नम हो गईं।
इन साथियों के बिना अधूरा सा लगेगा दफ्तर
मुख्यालय की जिन 6 शख्सियतों को आज विदाई दी गई, वे अपने-अपने विभागों की रीढ़ माने जाते थे। P&IR विभाग के मुख्य प्रबंधक (मानव संसाधन) अतनु चौधरी और इसी विभाग के कार्यालय अधीक्षक विनोद एमेल सुरीन के टेबल अब कल से नए लोगों के हवाले होंगे। JSSPS के सुरक्षा उप-निरीक्षक बिरसा उरांव, उत्पादन विभाग के कार्यालय अधीक्षक-A1 पंकज कुमार और CMPF विभाग के कार्यालय अधीक्षक लैजरस खलखो को भी उनके साथियों ने गले लगाकर विदा किया। वहीं गांधीनगर अस्पताल में मरीजों की सेवा में दिन-रात एक करने वालीं मैट्रन अनिता निर्मला तिर्की की कमी भी स्टाफ को बेहद खलेगी।
“आपकी कमी हमेशा महसूस होगी”
इस भावुक मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद एचआर डायरेक्टर हर्ष नाथ मिश्र ने बेहद आत्मीय अंदाज में सभी से बात की। उन्होंने कहा कि कोई भी कंपनी कोयले या मशीनों से नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों के पसीने से बड़ी बनती है। उन्होंने कहा कि आपने अपनी जिंदगी के कीमती साल इस कंपनी को मजबूत बनाने में लगा दिए। आपका अनुशासन, आपकी मेहनत और संकट के समय काम संभालने का आपका यह हुनर हमारे नए लड़कों के लिए एक सीख है। सीसीएल के इतिहास में आपका नाम हमेशा सम्मान से लिया जाएगा। उन्होंने सभी को शॉल ओढ़ाई, पुष्पगुच्छ दिए और एक स्मृति-चिह्न भेंट कर उनके नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
परिजनों की मौजूदगी ने बढ़ाया हौसला
इस फेयरवेल की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें रिटायर होने वाले कर्मचारियों के परिवार वाले भी बड़ी संख्या में आए थे। किसी का बेटा, किसी की पत्नी तो किसी की बहू-बेटी इस पल का गवाह बनने पहुंचे थे। जब इन कर्मियों को सम्मानित किया जा रहा था, तो उनके बच्चों के चेहरे गर्व से चमक रहे थे। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सबने एक-दूसरे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, पुरानी बातें याद की और इस वादे के साथ विदा लिया कि ‘भले ही दफ्तर छूट रहा है, पर यह पारिवारिक रिश्ता कभी नहीं टूटेगा।’
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