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Ranchi : कहते हैं कि अगर इंसान उम्मीद छोड़ भी दे, तो भी इंसानियत कभी रास्ता नहीं भटकती। रांची के बरियातू इलाके की एक सड़क के किनारे, जहां लोग अमूमन नाक सिकोड़कर आगे बढ़ जाते हैं, वहां पिछले चार दिनों से एक जिंदगी दम तोड़ रही थी। कचरे के बदबूदार ढेर के बीच, एक काले कंबल में लिपटा हुआ कोई इंसान पड़ा था। राहगीर आ रहे थे, जा रहे थे, लेकिन किसी ने रुकने की जहमत नहीं उठाई। मगर चौथे दिन, इस लावारिस पड़े शख्स की किस्मत ने करवट बदली और कानून के रखवालों ने मसीहा बनकर उसकी जान बचा ली।
जब थम गईं राहगीरों की नजरें
बरियातू थाना क्षेत्र के इस कचरे के ढेर के पास रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों की नजर आखिरकार उस काले कंबल पर टिक गई। हिलाने-डुलाने पर जब भीतर से हल्की सी कराह सुनाई दी, तो लोगों को समझ आया कि यह कोई लाश नहीं, बल्कि एक जीती-जागती जिंदगी है जो आखिरी सांसें गिन रही है। लोगों ने तुरंत इसकी जानकारी इलाके की PLV अनिता देवी को दी। अनिता देवी ने बिना एक पल गंवाए इस लाचार इंसान की सुध ली और तुरंत DLSA के सचिव राकेश रौशन को फोन घुमा दिया।
…और हरकत में आ गया पूरा महकमा
एक बेसहारा की जान बचाने के लिए कानून की चौखट कितनी संवेदनशील हो सकती है, इसकी मिसाल इसके बाद देखने को मिली। सूचना मिलते ही झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर अधिकारियों की टीम एक्टिव हो गई। झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना और रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा (प्रथम) के मार्गदर्शन में डालसा सचिव राकेश रौशन ने कमान संभाली। उन्होंने सीधे रिम्स अस्पताल के प्रशासन से बात की। देखते ही देखते डॉक्टरों और एम्बुलेंस की एक टीम उस बदबूदार कचरे के ढेर के पास पहुंच गई, जहां वह युवक पड़ा हुआ था। टीम ने उसे बड़े ही सम्मान और सावधानी के साथ वहां से उठाया और सीधे रिम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया।
जुबान खामोश थी, पर कांपते हाथों ने लिख दिया अपना नाम
रिम्स के डॉक्टरों ने जब युवक की जांच की, तो पता चला कि वह बुरी तरह टूट चुका है। उसके शरीर पर चोट के कई निशान थे। कमजोरी और सदमे की वजह से वह कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं था। डॉक्टर और डालसा के लोग यह जानने के लिए बेताब थे कि आखिर यह युवक कौन है और इस हाल में यहां कैसे पहुंचा?
जब जुबान ने साथ नहीं दिया, तो उसे एक कागज और पेन थमाया गया। कांपते हुए हाथों से उसने कागज पर जो लिखा, उसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भिगो दी। युवक ने लिखकर अपना नाम ‘आकाश’ बताया और लिखा कि वह बिहार का रहने वाला है। आकाश फिलहाल कुछ और बताने की स्थिति में नहीं है, लेकिन अस्पताल के बेड पर अब वह सुरक्षित है। उसकी तीमारदारी और देख-रेख के लिए डालसा रांची ने बकायदा एक पीएलवी को अस्पताल में ही तैनात कर दिया है, जो साये की तरह उसके साथ है।
“मदद के लिए बस एक कदम बढ़ाएं”
इस झकझोर देने वाली घटना के बाद डालसा सचिव राकेश रौशन ने शहर के लोगों से एक बेहद भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि हमारे आस-पास ऐसे कई ‘आकाश’ हो सकते हैं, जो किसी मजबूरी या हादसे का शिकार होकर जिंदगी की जंग हार रहे हैं। उन्होंने कहा कि “अगर आपके आस-पास कोई भी ऐसा बेसहारा, बुजुर्ग या लाचार इंसान दिखे, तो मुंह न मोड़ें। या फिर अगर आपको खुद किसी भी तरह की कानूनी परेशानी हो या मुफ्त कानूनी सलाह की जरूरत हो, तो बेझिझक रांची डालसा के दफ्तर आएं। आप सीधे हमारे टोल-फ्री नंबर 15100 पर भी कॉल कर सकते हैं। आपका एक फोन किसी की दुनिया उजाड़ने से बचा सकता है।”
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