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Home » नहीं रहे झारखंड के दिग्गज नेता मन्नान मल्लिक
झारखंड

नहीं रहे झारखंड के दिग्गज नेता मन्नान मल्लिक

July 14, 2026No Comments3 Mins Read
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Ranchi : झारखंड की राजनीति और कोयलांचल के श्रमिक आंदोलन के लिए मंगलवार का दिन बेहद दुखद रहा। राज्य के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मन्नान मल्लिक का मंगलवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने रांची के एक निजी अस्पताल में 83 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज जारी था। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर श्रमिक संगठनों तक शोक की लहर दौड़ गई।

सार्वजनिक जीवन की शुरुआत से राजनीति तक का लंबा सफर

मन्नान मल्लिक ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव के रूप में की थी। प्रशासन और राजनीति को करीब से समझने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। कांग्रेस के साथ जुड़कर उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। वह लंबे समय तक धनबाद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी सादगी और मिलनसार स्वभाव के कारण काफी लोकप्रिय थे।

2009 में बने विधायक, फिर संभाली मंत्री की जिम्मेदारी

वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में मन्नान मल्लिक कांग्रेस के टिकट पर धनबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से मंत्री बनाए गए। मंत्री रहते हुए उन्होंने विकास, जनहित और सामाजिक सरोकार से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया। आम लोगों के बीच उनकी पहचान ऐसे नेता की थी, जो बिना किसी औपचारिकता के लोगों की बातें सुनते थे और समस्याओं के समाधान की कोशिश करते थे।

कोयलांचल के मजदूरों की मजबूत आवाज थे मन्नान मल्लिक

मन्नान मल्लिक की सबसे बड़ी पहचान श्रमिक नेता के रूप में रही। उन्होंने कोयला क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई वर्षों तक लड़ी। वह राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (आरसीएमएस) और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष रहे। मजदूरों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए उन्होंने लगातार आवाज उठाई।बीसीसीएल और पूरे कोयलांचल क्षेत्र में मजदूरों के बीच उनकी मजबूत पकड़ थी। कई आंदोलनों और वार्ताओं में उन्होंने श्रमिकों का नेतृत्व किया और उनकी समस्याओं को सरकार और प्रबंधन तक मजबूती से पहुंचाया। यही वजह थी कि मजदूर उन्हें अपना भरोसेमंद नेता मानते थे।

नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मन्नान मल्लिक के निधन की खबर सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और श्रमिक संगठनों के नेताओं ने गहरा दुख जताया। बेरमो विधायक जयमंगल सिंह, राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की कार्यकारी अध्यक्ष अनुपमा सिंह, श्रमिक नेता बृजेंद्र प्रसाद सिंह, इंटक के राष्ट्रीय सचिव वीरेंद्र प्रसाद अंबष्ट, महामंत्री ए.के. झा, लगन देव यादव, सुरेंद्र यादव और मिथिलेश प्रसाद सिंह सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।नेताओं ने अपने शोक संदेश में कहा कि मन्नान मल्लिक ने पूरी जिंदगी जनसेवा, कांग्रेस संगठन और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दी। उनका जाना केवल कांग्रेस के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और कोयलांचल के श्रमिक आंदोलन के लिए बड़ी क्षति है।

सादगी और संघर्ष के लिए हमेशा याद किए जाएंगे

मन्नान मल्लिक का राजनीतिक जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने कभी अपनी जड़ों से दूरी नहीं बनाई और हमेशा आम लोगों के बीच रहकर काम किया। राजनीति हो या श्रमिक आंदोलन, उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाया।उनके निधन के साथ झारखंड ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिसने दशकों तक जनता, मजदूरों और संगठन के लिए काम किया। उनके विचार, संघर्ष और जनसेवा की विरासत आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करती रहेगी।

इसे भी पढ़ें : पत्नी से कलह पर रात में हुई पंचायत, भोर में बेडशीट के फंदे से लटका मिला राहुल

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